Yuva Haryana: रोहतक के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति में पहुंचे 47 वर्षीय मरीज को अत्याधुनिक ‘एक्सट्राकॉर्पोरियल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन’ (eCPR) और ‘वेनो-आर्टेरियल ईसीएमओ’ (VA-ECMO) तकनीक की मदद से नया जीवन प्रदान किया है। जहर के प्रभाव के कारण मरीज के दिल की पंपिंग क्षमता घटकर महज 20 प्रतिशत रह गई थी, जिसे डॉक्टरों की टीम ने 48 घंटे के भीतर सुधारकर 45 प्रतिशत तक पहुंचा दिया।
इस दुर्लभ और सफल केस स्टडी को पीजीआई रोहतक में आयोजित राष्ट्रीय हृदय सम्मेलन ‘क्रिसकॉन-2026’ (Chriscon-2026) में दूसरा पुरस्कार मिला है।
जहर के बाद आया कार्डियक अरेस्ट, हाथ-पांव पड़े ठंडे
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, डायबिटीज और हाइपरटेंशन से पीड़ित 47 वर्षीय मरीज को जहर खाने के बाद गंभीर हालत में दूसरे अस्पताल से रेफर किया गया था। अस्पताल पहुंचने पर मरीज के हाथ-पैर पूरी तरह ठंडे पड़ चुके थे और बीपी (रक्तचाप) बेहद कम हो गया था। जांच के दौरान मरीज की हृदय गति गिरकर 47 बीपीएम रह गई थी और दिल की पंपिंग क्षमता मात्र 20% बची थी।
इलाज के दौरान मरीज को कार्डियक अरेस्ट भी आया। पारंपरिक सीपीआर (CPR) दिए जाने के बावजूद दिल की धड़कन सामान्य स्थिति में नहीं आ सकी।
जांघ की नसों से जुड़ी ईसीएमओ मशीन
मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने पारंपरिक तरीकों के विफल होने पर तुरंत eCPR का सहारा लिया। डॉक्टरों की टीम ने मरीज की जांघ (फेमोरल) की नसों के जरिए ईसीएमओ (ECMO) मशीन को कनेक्ट किया।
इस मशीन ने 3 से 3.2 लीटर प्रति मिनट की दर से रक्त संचार बनाए रखा।
इससे मरीज के मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों को ऑक्सीजन व रक्त की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित हुई, जिससे अंगों को फेल होने से बचाया जा सका।
48 घंटे में 20% से 45% तक पहुंची दिल की कार्यक्षमता
ईसीएमओ का सपोर्ट मिलने के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिला:
- पहला दिन: इकोकार्डियोग्राफी में पंपिंग क्षमता 20% से बढ़कर 25% हुई।
- 48 घंटे के भीतर: दिल की पंपिंग क्षमता सुधरकर 45% तक पहुंच गई।
हृदय की स्वाभाविक क्षमता वापस लौटने के बाद मरीज को ईसीएमओ और वेंटिलेटर सपोर्ट से सुरक्षित हटा लिया गया।
टीम वर्क से दूर हुईं अन्य जटिलताएं
इलाज के दौरान मरीज को एनीमिया, पेट में रक्तस्राव और बाएं हाथ की नसों में थक्का जमने (ब्लड क्लॉटing) जैसी कई गंभीर जटिलताओं का सामना भी करना पड़ा। मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए इन सभी समस्याओं का सफल उपचार किया।
इस केस स्टडी को सम्मेलन में डॉ. नताशा बस्सी ने प्रस्तुत किया। इस सफल उपचार में डॉ. जय प्रकाश, डॉ. गौरव आर्य, डॉ. कीर्ति, डॉ. एकल अरोड़ा, डॉ. अनूप डांगी, डॉ. दीपिका, डॉ. निशा और डॉ. गौरव अरोड़ा का विशेष योगदान रहा।

