मानसिक परेशानी से जूझ रहे 83% लोग 18 से 45 साल के, काम और रिश्तों का तनाव बढ़ा रहा चिंता
Yuva Haryana: हरियाणा में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। मानसिक स्वास्थ्य सहायता मांगने वाले लोगों में 83 प्रतिशत मामले 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों से जुड़े हैं। काम का दबाव, करियर की चिंता, आर्थिक समस्याएं और रिश्तों में तनाव युवाओं व कामकाजी उम्र के लोगों की मानसिक परेशानियों के प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहे हैं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इन आंकड़ों ने एक बार फिर इस बात पर ध्यान दिलाया है कि मानसिक परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर सहायता लेना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव, बेचैनी, नींद की समस्या और भावनात्मक थकान को केवल सामान्य परेशानी मानकर टालना उचित नहीं है।
युवाओं और कामकाजी लोगों पर ज्यादा असर
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता लेने वालों में 18 से 45 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी सबसे अधिक बताई गई है। यह वह आयु वर्ग है, जिसमें लोग पढ़ाई, नौकरी, करियर बनाने, परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक स्थिरता के लिए एक साथ संघर्ष कर रहे होते हैं।
नौकरी में बेहतर प्रदर्शन का दबाव, रोजगार की अनिश्चितता, कार्यस्थल की चुनौतियां और भविष्य को लेकर चिंता मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं, पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत रिश्तों में तनाव से भी भावनात्मक परेशानी बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए जरूरी है कि लोग अपनी परेशानियों को साझा करें और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेने से न हिचकिचाएं।
काम और रिश्तों का तनाव भी बड़ी वजह
रिपोर्ट में कामकाज, करियर और रिश्तों से जुड़े तनाव को मानसिक परेशानी के महत्वपूर्ण कारणों में शामिल किया गया है। लंबे समय तक काम करना, काम और निजी जीवन के बीच संतुलन न बना पाना तथा आर्थिक दबाव व्यक्ति को मानसिक रूप से थका सकते हैं।
इसी तरह, रिश्तों में विवाद, अकेलापन और परिवार से अपेक्षाओं का दबाव भी चिंता और बेचैनी को बढ़ा सकता है। कई बार लोग सामाजिक दबाव या दूसरों की प्रतिक्रिया के डर से अपनी परेशानी किसी को नहीं बताते, जिससे समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि और भरोसेमंद लोगों से बातचीत तनाव को संभालने में मदद कर सकती है। हालांकि, लंबे समय तक परेशानी रहने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है।
गुरुग्राम सबसे आगे, फरीदाबाद दूसरे स्थान पर
हरियाणा में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता और शिकायतों के मामले में गुरुग्राम सबसे आगे रहा। फरीदाबाद दूसरे स्थान पर बताया गया है। इन शहरों में कामकाजी आबादी, तेज जीवनशैली और रोजगार से जुड़े दबाव मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा को महत्वपूर्ण बनाते हैं।
हालांकि, अधिक मामले सामने आने का अर्थ यह जरूरी नहीं कि किसी शहर में मानसिक समस्याएं ही सबसे अधिक हों। सहायता मांगने की जागरूकता, उपलब्ध सेवाएं और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी आंकड़ों को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए इन आंकड़ों को समझते समय यह देखना जरूरी है कि कितने लोग सहायता मांग रहे हैं, किन समस्याओं के लिए संपर्क कर रहे हैं और उन्हें किस तरह की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता जरूरी
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती हैं। इन्हें कमजोरी समझना या छिपाना समस्या के समाधान में बाधा बन सकता है। परिवार, दोस्तों और कार्यस्थल पर सहयोगी माहौल मिलने से परेशान व्यक्ति को अपनी बात साझा करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे, रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, नींद या भूख में लगातार बदलाव हो अथवा चिंता संभालना मुश्किल हो जाए, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेनी चाहिए।
हरियाणा में सामने आए आंकड़े मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित करते हैं। युवाओं और कामकाजी लोगों के लिए तनाव प्रबंधन, परामर्श सेवाएं और समय पर सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
मदद मांगना कमजोरी नहीं
मानसिक परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति को दोष देने या उसकी भावनाओं को कमतर आंकने के बजाय उसकी बात सुनना जरूरी है। परिवार और समाज की सकारात्मक भूमिका व्यक्ति को सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर मदद मिलने से कई परेशानियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितनी ही प्राथमिकता देना जरूरी है।

