हरियाणा में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, चंडीगढ़ CBI ने दर्ज किया केस; सिरसा के गोदाम में तीन महीने तक चली फर्जी ट्रेनिंग
Yuva Haryana: भारतीय खाद्य निगम (FCI) में नौकरी दिलाने के नाम पर 11 युवाओं से करीब 2.41 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये वसूले गए। इतना ही नहीं, कथित तौर पर फर्जी जॉइनिंग लेटर जारी किए गए और उम्मीदवारों को ट्रेनिंग के नाम पर तीन महीने तक अलग-अलग जगहों पर रखा गया। मामले में चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज किया है।
इस कथित भर्ती सिंडिकेट में हरियाणा के कई लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसी ने पानीपत के सोंधापुर निवासी राजिंदर बैरागी और भिवानी के कितलाना निवासी कृष्ण समेत पांच नामजद आरोपियों तथा अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच अभी जारी है और आरोपों की पुष्टि अदालत में होनी बाकी है।
फर्जी भर्ती का नेटवर्क कैसे चलाया गया ?
यह कथित सिंडिकेट अगस्त 2023 से सक्रिय था। आरोप है कि युवाओं को FCI में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूली गई। उम्मीदवारों को विश्वास में लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों और नियुक्ति प्रक्रिया का सहारा लिया गया।
आरोपियों ने कथित तौर पर उम्मीदवारों को जॉइनिंग लेटर दिए और ट्रेनिंग के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर बुलाया। इससे युवाओं को लगा कि उनकी सरकारी नौकरी लग चुकी है। बाद में यह पूरा मामला संदिग्ध होने पर सामने आया।
सिरसा के FCI गोदाम में तीन महीने चली फर्जी ट्रेनिंग
सिरसा स्थित FCI गोदाम में युवाओं को करीब तीन महीने तक ट्रेनिंग के नाम पर रखा गया। इसके अलावा, फतेहाबाद में कथित तौर पर फर्जी परीक्षा केंद्र बनाकर परीक्षा भी कराई गई।
जींद बस स्टैंड के पास, सोंधापुर और विश्वविद्यालयों की पार्किंग में युवाओं से ओएमआर शीट भरवाई गईं। आरोप है कि उम्मीदवारों को परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा दिखाकर भरोसा दिलाया गया कि उनकी भर्ती हो रही है।
कुछ उम्मीदवारों को मेडिकल जांच के लिए दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। हालांकि, इन सभी घटनाओं और संबंधित लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पद के हिसाब से तय किए गए थे पैसे
नौकरी दिलाने के नाम पर अलग-अलग पदों के लिए अलग रकम मांगी गई थी। कथित रेट कार्ड में सुपरवाइजर पद के लिए 14 लाख रुपये, क्लर्क के लिए 12 लाख रुपये और चपरासी के लिए 8 लाख रुपये तय होने की बात कही गई है।
आरोप है कि उम्मीदवारों से रकम लेने के बाद उन्हें फर्जी नियुक्ति दस्तावेज और ट्रेनिंग की व्यवस्था के जरिए भरोसे में रखा गया। इस मामले में कुल 11 युवाओं से करीब 2.41 करोड़ रुपये ठगे जाने की जानकारी सामने आई है।
पांच नामजद आरोपी, अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
CBI ने राजिंदर बैरागी और कृष्ण के अलावा कपिल, सुनील और हरपाल के नाम भी आरोपियों के रूप में दर्ज किए हैं। रिपोर्ट में कुछ अन्य लोगों के नाम भी उन व्यक्तियों के तौर पर बताए गए हैं जिन पर आरोपियों के साथ जुड़े होने का संदेह है। एजेंसी ने अज्ञात अधिकारियों की भूमिका की जांच भी शुरू की है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कथित नेटवर्क के तार प्रभावशाली लोगों और सरकारी विभागों तक पहुंचने के दावे किए गए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता या दोष साबित होना जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
युवाओं को नौकरी के नाम पर ठगी से सतर्क रहने की जरूरत
यह मामला सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए चेतावनी है। किसी भी भर्ती के लिए आवेदन, परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति से संबंधित जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से सत्यापित करनी चाहिए। नौकरी दिलाने के नाम पर निजी खाते में पैसे मांगने, अनधिकृत जॉइनिंग लेटर देने या बिना आधिकारिक सूचना के ट्रेनिंग बुलाने जैसी गतिविधियों से सावधान रहना जरूरी है।
फिलहाल CBI मामले की जांच कर रही है। जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित ठगी में किन लोगों की भूमिका थी, रकम कहां गई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता भी थी।

