ब्रैस्ट कैंसर का बदला पैटर्न: 50 साल की उम्र वाली बीमारी अब 25 की उम्र में, डॉक्टरों ने दी सतर्क रहने की सलाह
Yuva Haryana: ब्रैस्ट कैंसर अब केवल अधिक उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रह गया है। कम उम्र की महिलाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। रोहतक में आयोजित दो दिवसीय ब्रैस्ट पैथोलॉजी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों ने ब्रैस्ट कैंसर, साइटोलॉजी और दुर्लभ ट्यूमर से जुड़े शोध और बदलते पैटर्न पर चर्चा की।
कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से 325 से अधिक डेलीगेट्स शामिल हुए। इसमें ब्रैस्ट कार्सिनोमा, गाइनेकोमैस्टिया, पैपिलरी सिस्टाडेनोमा, बायोमार्कर, साइटोलॉजी और दुर्लभ ट्यूमर सहित विभिन्न विषयों पर शोध प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में 32 ओरल और 74 पोस्टर प्रेजेंटेशन भी हुए।
देर से शादी और बदलती जीवनशैली से बढ़ रहा खतरा
डॉक्टरों के अनुसार देर से शादी, देर से मां बनना, कम समय तक स्तनपान, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव, हार्मोनल असंतुलन और परिवार में कैंसर का इतिहास जैसे कारण ब्रैस्ट कैंसर के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने युवतियों को शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी।
गांठ को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों ने कहा कि ब्रैस्ट में गांठ महसूस होने पर उसे सामान्य मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और बीमारी की पहचान से उपचार की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। डॉक्टरों ने महिलाओं को नियमित जांच और किसी भी असामान्य बदलाव पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
भारत में स्क्रीनिंग सुविधाओं की कमी भी चुनौती
विशेषज्ञों ने भारत में व्यापक स्क्रीनिंग सुविधाओं की कमी को भी एक बड़ी चुनौती बताया। डॉक्टरों के मुताबिक जागरूकता बढ़ाने के साथ शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान के लिए स्क्रीनिंग सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। आधुनिक जांच तकनीकों और समय पर उपचार से मरीजों के लिए नई उम्मीदें बढ़ी हैं।

