Yuva Haryana : हरियाणा, जिसे पारंपरिक रूप से दूध और दही खाने के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके बावजूद भी हरियाणा में कुपोषण को लेकर एक बड़ी चिंताजनक खबर सामने आई है।
दरअसल, हरियाणा में पांच साल तक की उम्र के 35 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इस चिंताजनक रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार ने हरियाणा को कुपोषण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने के दिशा-निर्देश दिए है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार हाल ही में केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण ट्रैकर पोर्टल की रिपोर्ट में यह आंकड़े सामने आए।
रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में 5 साल तक की उम्र के 13.82 लाख बच्चों की जांच की गई है, जिनमें 4.83 लाख बच्चे कुपोषित मिले।
रिपोर्ट में और क्या सामने आया ?
- बौनापन – 3.4 लाख बच्चे (22 प्रतिशत)
- कम वजन – 96796 बच्चे (7 प्रतिशत)
- कमजोर – 41484 बच्चे (3 प्रतिशत)
- ज्यादा वजन – 41480 बच्चे (3 प्रतिशत)
हरियाणा की जिलेवार रिपोर्ट के अनुसार यह भी सामने आया है कि पानीपत, पलवल और हिसार के बच्चों का कद औसत से कम हो रहा है, जो कि बौनापन की श्रेणी में शामिल है।
पानीपत और हिसार में पांच साल तक के बच्चों की जांच में 32 प्रतिशत और पलवल में 41 प्रतिशत बच्चे बौनेपन का शिकार है।
वहीं सोनीपत एक ऐसा जिला है, जहां कम कुपोषित के मामले में रैंकिंग सबसे अच्छी रही। यहां बच्चे मोटापे का शिकार नहीं हो रहे है। 5 साल तक के 77 हजार बच्चों की जांच में कमजोर बच्चे मात्र एक प्रतिशत, कम वजन वाले दो प्रतिशत, बौनेपन वाले आठ प्रतिशत बच्चे ही मिले।
दूसरी तरफ पलवल जिले के हालात सबसे खराब है। यहां पर बच्चों में बौनापन 41 प्रतिशत, कम वजन के बच्चे 14 प्रतिशत, कमजोर बच्चे पांच प्रतिशत, मोटापे वाले बच्चे 8 प्रतिशत मिले।
आपको यह भी बता दें कि बच्चों को आयु अनुसार खानपान न मिलने के चलते कुपोषण के मामले बढ़े है। ऐसे में आज हरियाणा में बच्चों के सही खानपान पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है।



