21.80 लाख टन धान की खरीद पूरी, किसानों के खातों में नहीं पहुंची पूरी रकम; कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा 444 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित
Yuva Haryana: हरियाणा में खरीफ सीजन के दौरान धान की सरकारी खरीद के बाद किसानों को भुगतान मिलने में देरी की समस्या सामने आई है। धान बेचने के 15 दिन बाद भी कई किसानों के बैंक खातों में फसल की रकम नहीं पहुंची है। राज्य में अब तक 21.80 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है, लेकिन किसानों को मिलने वाली कुल राशि में से 2,129 करोड़ रुपये का भुगतान अभी लंबित है। सबसे ज्यादा बकाया कुरुक्षेत्र जिले में है, जहां किसानों के 444.43 करोड़ रुपये अटके हुए हैं।
किसानों का कहना है कि फसल बेचने के बाद उन्हें भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है। इससे खेती के अगले चरण, घरेलू खर्च और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में परेशानी हो सकती है।
5,364 करोड़ रुपये की धान खरीद, 2,129 करोड़ बकाया
हरियाणा में अब तक 21.80 लाख टन धान खरीदा गया है। इसकी कुल कीमत लगभग 5,364.98 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें से किसानों को करीब 3,235 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 2,129 करोड़ रुपये की रकम अभी बकाया है।
राज्य में धान खरीद की प्रक्रिया जारी है। कुल खरीद में से करीब 14.60 लाख टन धान का उठान भी हो चुका है। हालांकि, भुगतान में देरी किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
सरकारी खरीद व्यवस्था के तहत किसानों को उनकी उपज का भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना होता है। ऐसे में खरीद के बाद रकम समय पर खाते में पहुंचना किसानों की आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।
कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा 444 करोड़ रुपये अटके
जिलेवार आंकड़ों में कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक भुगतान लंबित बताया गया है। यहां किसानों के करीब 444.43 करोड़ रुपये बकाया हैं। कैथल में धान खरीद के लिए किसानों को लगभग 650 करोड़ रुपये दिए जाने की जानकारी है, जबकि 373.78 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित बताया गया है।
यमुनानगर में 430.60 करोड़ रुपये की धान खरीद में से 210.88 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, जबकि 219.72 करोड़ रुपये की रकम अभी बाकी है। सिरसा में करीब 4 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई है और लगभग 50 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित बताया गया है।
जींद में 1,734 किसानों के 37.93 करोड़ रुपये की भुगतान प्रक्रिया जारी होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि भुगतान की स्थिति अलग-अलग जिलों में अलग है और कई जगह किसानों को अभी रकम मिलने का इंतजार है।
फसल बेचने के बाद भी बैंक खाते देख रहे किसान
कैथल जिले के बरसाना गांव के किसान रोशन लाल के अनुसार, उन्होंने 12 दिन पहले पुंडरी मंडी में पांच एकड़ की फसल बेची थी, लेकिन अब तक भुगतान नहीं मिला। उन्होंने बताया कि फसल बेचने के बाद से वह भुगतान के लिए इंतजार कर रहे हैं और अब खाते की जांच कर रहे हैं।
करनाल जिले के निसिंग क्षेत्र के किसान राजेश ने बताया कि उन्होंने 3 अक्टूबर को चार एकड़ का धान बेचा था। उनके अनुसार, 15 दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी रकम खाते में नहीं आई। उन्हें बताया गया कि भुगतान लिफ्टिंग यानी खरीदे गए धान के उठान के बाद आएगा।
हिसार जिले के डाबड़ा क्षेत्र के किसान सुरेश ने बताया कि उन्होंने 10 अक्टूबर को बरवाला में धान बेचा था, लेकिन भुगतान नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दोबारा बैंक खाता चेक कराया और पहचान पत्र की कॉपी भी मांगी गई।
उठान और भुगतान में देरी बनी चिंता
धान खरीद के बाद मंडियों से फसल का उठान और भुगतान की प्रक्रिया समय पर पूरी होना जरूरी है। यदि इन प्रक्रियाओं में देरी होती है, तो किसानों को अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए इंतजार करना पड़ता है।
धान बेचने के बाद मिलने वाली रकम से किसान अगली फसल की तैयारी, बीज, खाद, मजदूरी और घरेलू जरूरतों का खर्च पूरा करते हैं। ऐसे में भुगतान अटकने से उनकी नकदी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
किसानों को समय पर भुगतान की जरूरत
हरियाणा में धान खरीद के साथ भुगतान की गति भी महत्वपूर्ण है। राज्य में अब तक 21.80 लाख टन धान की खरीद और 2,129 करोड़ रुपये के बकाये के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। किसानों को उम्मीद है कि लंबित भुगतान जल्द उनके बैंक खातों में पहुंचेगा और खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी।

