हरियाणा ITI विभाग में तबादलों पर उठे सवाल, वर्षों से निदेशालय में तैनात अधिकारियों के मामलों की जांच की तैयारी
Yuva India: हरियाणा के कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग में अधिकारियों की तैनाती और तबादला प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के कुछ अधिकारी लंबे समय से निदेशालय में तैनात हैं। वहीं, कुछ अधिकारियों को ऑफलाइन आदेशों के जरिए दूसरे संस्थानों में भेजने के बाद कुछ ही समय में दोबारा निदेशालय बुला लिया गया। इन मामलों ने विभाग की ऑनलाइन तबादला नीति और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस शुरू कर दी है।
कुछ सहायक निदेशकों की निदेशालय में तैनाती का कार्यकाल कई वर्षों पुराना है। सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रदेश में ऑनलाइन ट्रांसफर व्यवस्था लागू है, तो कुछ अधिकारियों को लंबे समय तक एक ही स्थान पर बनाए रखने और बार-बार वापस बुलाने का आधार क्या रहा है।
2007 से निदेशालय में तैनाती का दावा
विभागीय रिकॉर्ड के हवाले से तीन अधिकारियों की तैनाती की तारीखों का उल्लेख किया गया है। इनमें एक अधिकारी की निदेशालय में तैनाती 25 जून 2007 से बताई गई है। दूसरे अधिकारी की तैनाती 10 मार्च 2014 और तीसरे अधिकारी की तैनाती 1 अप्रैल 2014 से दर्ज होने का दावा है।
यदि ये रिकॉर्ड सही हैं, तो लंबे समय तक एक ही कार्यालय में तैनाती के प्रशासनिक आधार की जांच जरूरी हो जाती है। सामान्य तौर पर सरकारी विभागों में स्थानांतरण का उद्देश्य प्रशासनिक जरूरतों के साथ कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर कार्य का अवसर देना भी होता है।
कुछ महीनों में ही वापस निदेशालय बुलाए गए अधिकारी
पड़ताल में कुछ ऐसे तबादलों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें अधिकारियों को दूसरे संस्थानों में भेजने के बाद कम समय में ही वापस निदेशालय में तैनात कर दिया गया।
एक सहायक निदेशक को 16 जुलाई 2025 को ऑफलाइन आदेश के माध्यम से राजकीय आईटीआई अंबाला (महिला) में प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया था। हालांकि, कुछ महीनों बाद उन्हें फिर निदेशालय में तैनाती दे दी गई।
इसी तरह अप्रैल 2025 में एक अन्य सहायक निदेशक को राजकीय आईटीआई पंचकूला में प्रधानाचार्य लगाया गया, लेकिन करीब सात सप्ताह बाद जून में उन्हें वापस निदेशालय बुला लिया गया। जून 2025 में भी एक अन्य अधिकारी के साथ ऐसी ही प्रक्रिया अपनाए जाने का दावा किया गया है।
इन मामलों में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि तबादले प्रशासनिक आवश्यकता के तहत किए गए थे या इनके पीछे कोई विशेष कारण था। इसके लिए संबंधित आदेशों, फाइल नोटिंग और सक्षम अधिकारी की मंजूरी की जांच अहम होगी।
ऑनलाइन ट्रांसफर नीति के बीच ऑफलाइन आदेशों पर सवाल
हरियाणा सरकार ने सरकारी विभागों में तबादलों को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में ऑफलाइन आदेश भी जारी किए जा सकते हैं। ऐसे में किसी भी ऑफलाइन तबादले के पीछे प्रशासनिक कारण और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति का रिकॉर्ड होना जरूरी है।
इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित अधिकारियों के तबादलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था। साथ ही, क्या इन आदेशों की जानकारी HRMS रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज की गई थी।
पड़ताल में ‘नॉशनल श्रेणी’ के तहत कुछ कर्मचारियों को शामिल करने और अलग-अलग मामलों में अलग व्यवस्था अपनाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। विभाग के करीब 100 संवर्गों में तैनाती और तबादलों की प्रक्रिया की जांच के लिए आदेशों, मंजूरी और HRMS रिकॉर्ड का मिलान करना जरूरी होगा।
निदेशक पार्थ गुप्ता ने जांच का दिया भरोसा
मामले में विभाग के निदेशक पार्थ गुप्ता का कहना है कि तबादला प्रक्रिया ऑनलाइन है और विशेष परिस्थितियों में ही ऑफलाइन आदेश जारी किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती, ऑफलाइन तबादलों और कुछ समय बाद वापस बुलाने के मामलों में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो इसकी उच्च स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पार्थ गुप्ता को 9 सितंबर 2026 से कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के निदेशक के रूप में दर्ज किया गया है।
रिकॉर्ड की जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
अब इस मामले में विभागीय रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। संबंधित अधिकारियों के नियुक्ति और तबादला आदेश, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी, फाइल नोटिंग तथा HRMS में दर्ज विवरण का मिलान किया जाना चाहिए।
फिलहाल सामने आए आरोपों के आधार पर किसी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लंबे समय तक तैनाती और बार-बार तबादले के पीछे प्रशासनिक जरूरत थी या नियमों के उल्लंघन की कोई स्थिति बनी।

