दिवाली से पहले हरियाणा की हवा खराब, अंबाला में AQI 303; कई शहरों में बढ़ा प्रदूषण
Yuva Haryana: दिवाली से पहले हरियाणा में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। प्रदेश के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खराब स्थिति में पहुंच गया है। अंबाला में AQI 303 दर्ज किया गया, जबकि कैथल में यह 296 तक पहुंच गया। इसके अलावा कुरुक्षेत्र, जींद, बल्लभगढ़, बहादुरगढ़ और पानीपत में भी हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। प्रदूषण बढ़ने के बीच दिल्ली-एनसीआर में वाहनों को लेकर नए प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं।
त्योहारी सीजन में बाजारों और सड़कों पर बढ़ती आवाजाही, वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली जलाने की घटनाएं वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। मौसम में बदलाव और हवा की गति कम होने पर प्रदूषक कण वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं।
अंबाला और कैथल में सबसे ज्यादा चिंता
अंबाला का AQI 303 दर्ज किया गया है। भारतीय वायु गुणवत्ता सूचकांक के मानकों में 301 से 400 के बीच AQI को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से सांस लेने में परेशानी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
कैथल में AQI 296 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी के करीब है। इसके अलावा कुरुक्षेत्र में 244, जींद में 247, बल्लभगढ़ में 233, बहादुरगढ़ में 231 और पानीपत में 224 AQI बताया गया है। इन शहरों में हवा ‘खराब’ श्रेणी में है।
वहीं, यमुनानगर में 186, गुरुग्राम में 183, हिसार में 133, रोहतक में 127 और भिवानी में 108 AQI दर्ज किया गया। फरीदाबाद का AQI 94 बताया गया है, जो इन शहरों के मुकाबले बेहतर है। हालांकि, अलग-अलग निगरानी केंद्रों और समय के अनुसार AQI में बदलाव हो सकता है।
तापमान में गिरावट और धीमी हवा से बढ़ सकती है परेशानी
मौसम में ठंडक बढ़ने के साथ प्रदूषण की समस्या भी गंभीर हो सकती है। सुबह और रात के समय तापमान कम होने तथा हवा की रफ्तार धीमी रहने पर धूल और धुएं के कण वातावरण में जमा हो सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में पराली जलाने, वाहनों के धुएं, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक उत्सर्जन को प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में गिना जाता है। हालांकि, किसी एक शहर के AQI में इन सभी कारकों का कितना योगदान है, यह प्रदूषण के स्रोतों के वैज्ञानिक विश्लेषण से ही स्पष्ट होता है।
दिल्ली में 1 नवंबर से गैर-BS6 वाहनों की एंट्री पर रोक
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 1 नवंबर 2026 से राजधानी में बाहर के राज्यों में पंजीकृत गैर-BS6 वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू किया है। यह व्यवस्था 31 जनवरी 2027 तक लागू रहने वाली है। नियमों के तहत BS6 मानक वाले वाहनों के अलावा CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को निर्धारित शर्तों के अनुसार प्रवेश की अनुमति है। वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) भी जरूरी है।
इस प्रतिबंध का असर हरियाणा से दिल्ली आने-जाने वाले वाहन चालकों पर भी पड़ा है। प्रतिबंध लागू होने के पहले दिन दिल्ली-गुरुग्राम सीमा के सरहौल बॉर्डर और राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। जांच के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी की जरूरत
डॉक्टरों के अनुसार, खराब हवा का असर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों पर अधिक पड़ सकता है। प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि AQI अधिक होने पर सुबह-शाम खुले में व्यायाम करने से बचें और जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क इस्तेमाल करें। सांस लेने में परेशानी या लगातार खांसी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
दिवाली पर प्रदूषण बढ़ने की आशंका
दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से हवा में धूल और सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ सकती है। ऐसे में पहले से प्रदूषण झेल रहे शहरों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका रहती है। लोगों से अपील है कि वे पटाखों का इस्तेमाल कम करें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी प्रदूषण नियंत्रण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
हरियाणा में आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता पर मौसम और प्रदूषण नियंत्रण उपायों का असर देखने को मिलेगा। इसलिए लोगों को अपने शहर का ताजा AQI देखकर ही बाहर निकलने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की जरूरत है।

