Yuva Haryana: एशियन गेम्स 2026 में 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान अमन सहरावत ने अपनी सफलता के पीछे की कठिन मेहनत और अनुशासन की कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि वजन नियंत्रित रखने के लिए मुकाबले से एक दिन पहले उन्होंने पानी पीना तक बंद कर दिया था।
आठ महीने तक सामाजिक कार्यक्रमों से बनाए रखी दूरी
अमन सहरावत ने कहा कि एशियन गेम्स की तैयारी के दौरान उन्होंने करीब आठ महीने तक किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। उनका पूरा ध्यान केवल अभ्यास, फिटनेस और प्रतियोगिता की तैयारी पर था।
उन्होंने बताया कि खिलाड़ी के लिए मानसिक और शारीरिक अनुशासन दोनों बेहद जरूरी होते हैं और इसी के बल पर वह स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे।
वजन को लेकर थे बेहद सतर्क
अमन ने बताया कि मुकाबले से पहले वजन को लेकर वह काफी सतर्क थे। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता से एक दिन पहले पानी पीना भी छोड़ दिया था ताकि तय वजन वर्ग में बने रह सकें। जब वजन जांच में उनका वजन निर्धारित सीमा से 300 ग्राम कम निकला तो उन्हें राहत मिली।
सिर्फ अपनी कुश्ती पर रखा फोकस
पहलवान अमन सहरावत ने कहा कि उन्होंने प्रतियोगिता के दौरान अपने प्रतिद्वंद्वियों की रणनीति पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। कोच की सलाह के अनुसार उनका पूरा फोकस अपनी कुश्ती, तकनीक और रणनीति पर रहा।
उन्होंने कहा कि फाइनल मुकाबले में उनकी रणनीति साफ थी कि विरोधी को अंक हासिल करने का मौका नहीं देना है और जहां मौका मिले, वहां अंक बटोरने हैं।
अब ओलंपिक पदक पर नजर
अमन सहरावत ने कहा कि एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है, लेकिन अब उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतना है। उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स का गोल्ड महत्वपूर्ण है, लेकिन ओलंपिक सफलता उनके करियर का सबसे बड़ा सपना है।
भारतीय कुश्ती के लिए अच्छा संकेत
अमन ने कहा कि भारतीय कुश्ती के लिए यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण है। लंबे समय बाद भारतीय पहलवानों ने एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया है, जिससे आने वाले वर्षों में खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और बढ़ेगा।

