Yuva Haryana: हरियाणा के बहुचर्चित सीएलयू सीडी कांड में एक नई अपडेट सामने आई है। दरअसल, इस मामले में अदालत ने एक भाजपा विधायक के करीबी कारोबारी को बरी कर दिया है।
दरअसल, हम बात कर रहे हैं हांसी के कारोबारी और भाजपा विधायक विनोद भ्याना के करीबी भुवनेश ऐलावादी की, जिन्हें हिसार की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश खत्री सौरभ की अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा और पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूत कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं हैं।
आपको बता दें कि इस मामले में तत्कालीन मुख्य संसदीय सचिव विनोद भ्याना को पहले ही क्लीन चिट मिल चुकी है।
क्या था मामला ?
- पूर्व कांग्रेस सरकार के दौरान सीएलयू घूसकांड साल 2013-14 में सामने आया था
- तत्कालीन सीपीएस विनोद भ्याना के नजदीकी भुवनेश सीएलयू की एवज में घूस की मांग करता कथित स्टिंग ऑपरेशन में कैद हुआ
- 29 जनवरी 2016 को एसीबी ने केस दर्ज किया
- तीन साल पहले ही भुवनेश की गिरफ्तारी हुई थी
- जांच के दौरान विनोद भ्याना के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले तो उन्हें क्लीन चिट मिली
आपको बता दें कि यह मामला साल 2013-14 के कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ा हुआ है। तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और विनोद भ्याना मुख्य संसदीय सचिव थे। इस दौरान धर्मेंद्र कोहाड़ नामक व्यक्ति ने एक स्टिंग ऑपरेशन में आरोप लगाया था कि सीएलयू दिलाने के लिए 2.5 करोड़ रुपये और वक्फ बोर्ड की भूमि की लीज के लिए 25-30 लाख रुपये की मांग की गई।
उस दौरान यह वीडियो सीडी के रूप में सामने आया और उस समय राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। हालांकि, एफआईआर साल 2016 में भाजपा सरकार के दौरान दर्ज की गई और इसमें भुवनेश ऐलावादी का नाम पहले और विधायक भ्याना का बाद में दर्ज हुआ।
इसके बाद इस मामले की कई वर्षों तक जांच चलती रही, लेकिन पहली गिरफ्तारी 2022 में हुई। विजिलेंस ब्यूरो की हिसार टीम ने भुवनेश ऐलावादी को हांसी स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान विजिलेंस ने भुवनेश के वॉयस सैंपल लिए और उन्हें लैब भेजा। रिपोर्ट में कहा गया कि स्टिंग वीडियो और भुवनेश की आवाज में समानता पाई गई थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया गया।
लेकिन, कोर्ट का मानना है कि सीडी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं की गई। धारा 65-बी का प्रमाणपत्र तकनीकी मानकों पर खरा नहीं उतरा। न तो स्टिंग की मूल मेमोरी चिप पुलिस ने कब्जे में ली और न ही रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया स्पष्ट की गई।
वहीं गवाह धर्मेंद्र ने स्टिंग को लेकर अलग-अलग बयान दिए, जिससे पूरे मामले की विश्वसनीयता पर सवाल उठे। अदालत ने कहा कि केवल विरोधाभासी बयानों और अप्रमाणिक वीडियो के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
आपको यह भी बता दें कि इस मामले को इनेलो ने जोर-शोर से उठाया था। मौजूदा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, नरेश सेलवाल, जरनैल सिंह, रामनिवास घोड़ेला, विनोद भ्याना और रामकिशन फौजी की सीडी भी जारी की, जो कि सीएलयू सीडी कांड के नाम से प्रदेश में खासा चर्चा में रही।



