मुकदमों के बोझ तले दबी हरियाणा की अदालतें, न्यायिक व्यवस्था की चाल इतनी धीमी क्यों ? जानें

Yuva Haryana : भारत में न्यायिक व्यवस्था में मुकदमों का लंबे समय चलना एक गंभीर विषय है। एक आंकड़े के मुताबिक देशभर में सवा पांच करोड़ से ज्यादा मुकदमे सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालतों तक लंबित हैं।
विधि और न्याय मंत्रालय के एक ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सवा पांच करोड़ लंबित मामलों में साढ़े चार करोड़ यानी 85 फीसद तो जिला अदालतों में हैं। लंबित मामलों में से ज्यादा मुकदमों में मुद्दई यानी मुकदमेबाज सरकार ही है।
अगर हरियाणा राज्य की बात करें तो यहां की अदालतें मुकदमों के बोझ के नीचे दबी पड़ी है। एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार हरियाणा की अदालतों में 15 लाख से ज्यादा केस पेंडिंग पड़े है और ये मामले साल 1980 से लेकर 2025 तक के है।
खबर में प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा 2.63 लाख यानी कि करीब 17 प्रतिशत केस वकीलों के पेश न होने, 98 हजार केस स्टे ऑर्डर और 37 हजार केस गवाह पेश न होने के चलते अदालतों में लटके पड़े है।
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड पोर्टल के मुताबिक 19 हजार केसों में कोर्ट को डॉक्यूमेंट का इंतजार है। वहीं वकील अचानक तबीयत बिगड़ने और कोई दूसरा काम आदि होने की बात कहकर सुनवाई के दौरान कोर्ट नहीं पहुंचते।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि फैसलों की देरी न्याय प्रणाली की दक्षता पर गंभीर सवाल है।
वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार दावा करती है कि देश में तीन नए कानूनों से 2006 से केस का निपटान तीन साल में होगा। लेकिन, कानूनविदों के मुताबिक मौजूदा संसाधनों में यह संभव ही नहीं है।
इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2025 के मुताबिक हरियाणा की जिला अदालतों में जजों के करीब 30 प्रतिशत पद खाली है, जबकि हाईकोर्ट में 40 प्रतिशत पदों पर भर्ती का इंतजार हो रहा है।
जजों के स्वीकृत पदों के हिसाब से 25 प्रतिशत कोर्ट रूम कम है। इन्हीं कारणों की वजह से करीब आठ लाख केस एक साल से ज्यादा पुराने समय से चल रहे है।
48,959 केसों का ट्रायल शुरू ही नहीं हो पाया। कुल लंबित केसों में महिलाओं के 105554 और सीनियर सिटीजन के 100457 केस है।
साल दर साल इतने पेंडिंग केस
2016 : 4239
2017 : 12531
2018 : 33401
2019 : 88136
2020 : 88617
2021 : 126776
2022 : 182654
2023 : 239283
2024 : 314684
2025 : 421695
फैसलों में देरी के ये बड़े कारण
- 263795 मामलों में वकील पेश नहीं हुए
- 98130 मामलों में स्टे ऑर्डर बाधा
- 37339 मामलों में गवाहों की पेशी नहीं हुई
- 24030 मामलों में आरोपी फरार
- 19894 मामलों में थाने से दस्तावेज गायब
- 4346 मामलों में 20 ज्यादा गवाह होने के कारण गवाही में देरी
- 5219 मामलों में पीड़ित पक्ष केस लड़ने से पीछे हटा
- 7748 मामलों में बार-बार अपील हो रही
- 2221 मामलों में हाईकोर्ट का स्टे
- 56 मामलों में सुप्रीम कोर्ट का स्टे
लंबित केसों के जल्द निपटारे के लिए क्या करना चाहिए ?
- लॉ कमीशन की रिपोर्ट अनुसार 50 जज हो
- सभी कोर्ट में विशेष बेंच बनाई जाए
- केस मैनेजमेंट सिस्टम लागू कर ट्रायल के लिए समयावधि तय हो
- ऑनलाइन सुनवाई पर जोर देने की जरूरत
- नए वकीलों को ट्रेनिंग
- जिला अदालतों में जजों के पास स्टेनों की संख्या पूरी की जाए
- पुलिस की गवाही में देरी न हो
First published on: November 05, 2025 06:46 PM