Yuva Haryana : केंद्र सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में हरियाणा और पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ को शामिल करने के लिए एक विधेयक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में लाने की खबर के बाद सियासत गरमाई हुई है। हरियाणा और पंजाब के नेता इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।
दरअसल, चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा दोनों की संयुक्त राजधानी है। मौजूदा समय में पंजाब के राज्यपाल ही चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक हैं। इससे पहले, एक नवंबर 1966 से जब पंजाब का पुनर्गठन हुआ था तब चंडीगढ़ का प्रशासन स्वतंत्र रूप से मुख्य सचिव द्वारा किया जाता था।
ऐसे में अगर यह नया विधेयक लागू होता है तो देश के राष्ट्रपति को संघ शासित क्षेत्र के लिए सीधे विनियम और कानून बनाने का अधिकार प्राप्त हो जाएगा।
हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने राजधानी चंडीगढ़ का नियंत्रण केंद्र सरकार के हाथों में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ पर केंद्र का प्रशासनिक दखल बढ़ाना हमारे हित में नहीं है और हरियाणा की भाजपा सरकार को इसका विरोध करते हुए ऐसे आशंकाओं पर रोक लगवानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि चंडीगढ़ में हरियाणा की हिस्सेदारी 60-40 के अनुपात की बजाय 50-50 करवाई जाए और इसके लिए हरियाणा की भाजपा सरकार केंद्र में अपनी पार्टी की सरकार पर दबाव बनाए।
दरअसल, वे सोमवार को रोहतक जिले के विभिन्न गांवों में जनसम्पर्क अभियान पर थे। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने विभिन्न खबरों में संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में राजधानी चंडीगढ़ के बारे में प्रस्ताव लाकर इसका नियंत्रण केंद्र सरकार के अधीन लिए जाने की संभावना पर विरोध जताया और कहा कि हरियाणा के सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र शासित क्षेत्र होने के चलते चंडीगढ़ पर पहले से ही केंद्र सरकार के अधिकारियों की पर्याप्त हिस्सेदारी है और इसे बढ़ाना हरियाणा और पंजाब के अपनी राजधानी पर अधिकार को कम करने वाला कदम होगा।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि मीडिया स्रोतों से प्राप्त सूचना के अनुसार केंद्र सरकार के शीतकालीन सत्र के लिए संसद में पेश करने के लिए बिल तैयार कर लिया है और इसे सूचिबद्ध भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि बिना दोनों राज्यों से व्यापक चर्चा और सहमति के कोई भी कदम उठाना धक्केशाही माना जाएगा और दोनों राज्यों के लोग इसका विरोध करेंगे।
दुष्यंत चौटाला ने हैरानी जताई कि हरियाणा की भाजपा सरकार इस विषय पर अब तक चुप क्यों है और केंद्र के भारी दबाव में क्यों दिख रही है।
इसके साथ ही दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हरियाणा के गठन के समय चंडीगढ़ के संसाधनों और संस्थाओं में पंजाब को 60 और हरियाणा को 40 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि 1966 में भले ही यह फैसला मंजूर कर लिया गया हो लेकिन आज हरियाणा विकास और देश के जीडीपी व आमदनी में योगदान देने में पंजाब से कहीं आगे निकल गया है।
उन्होंने कहा कि अब हरियाणा को यह भेदभाव खत्म करवाना चाहिए और चंडीगढ़ में हिस्सेदारी 50-50 प्रतिशत की करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र और हरियाणा दोनों जगह भाजपा की सरकार है, ऐसे में अगर हरियाणा के हितों पर किसी तरह का कुठाराघात किया गया तो यह माना जाएगा कि हरियाणा की नायब सिंह सरकार ने हरियाणा के हितों को अपने पार्टी नेतृत्व के यहां गिरवी रख दिया है।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस विषय पर तुरंत प्रधानमंत्री से मुलाकात करनी चाहिए और उनसे चंडीगढ़ में हरियाणा की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत करने की मांग करनी चाहिए।
हालांकि, अब इस मामले में केंद्र सरकार यू-टर्न भी लेता हुआ दिखाई दे रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय का साफ कहना है कि:-
“यह प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के विचार में है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। यह सिर्फ चंडीगढ़ के लिए केंद्रीय कानून बनाने की प्रक्रिया को आसान करने से जुड़ा है और इससे चंडीगढ़ की व्यवस्था, प्रशासन या पंजाब-हरियाणा के साथ उसके संबंधों में कोई बदलाव नहीं होगा”



