Yuva Haryana : हरियाणा के पुरातत्व विभाग की उप निदेशक डॉ बिनानी भट्टाचार्य पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगे है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने कार्रवाई करते हुए डॉ बिनानी और आईआईटी कानपुर के जावेद पर एफआईआर दर्ज की गई है।
मामला सरकारी फंड के दुरुपयोग और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। डॉ बिनानी पर साल 2014 से लेकर 2023 तक ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार (जीपीआर) सर्वे में फंड के दुरुपयोग, टेंडर नियमों के उल्लंघन और विशेष पसंदीदा एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगे है।
एसीबी से मिली जानकारी के अनुसार शिकायतों की प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। जांच एजेंसी ने पुरातत्व विभाग से जीपीआर सर्वे से संबंधित सभी फाइलें तलब की हैं। इनमें अन्य कंपनियों के कोटेशन और टेंडर से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
शिकायक में दावा किया गया है कि डॉ भट्टाचार्य ने डिप्टी डायरेक्टर के पद पर रहते हुए 2014 से जीपीआर सर्वे में पैसे का गलत इस्तेमाल किया। टेंडर नियमों के खिलाफ जाकर एक खास एजेंसी को फायदा पहुंचाया गया। उन पर आरोप है कि खरीद प्रक्रिया को अपने कंट्रोल में रखा और जानबूझकर टेंडर की जानकारी खुले बाजार में नहीं दी। किसी भी मीडिया में टेंडर का विज्ञापन जारी नहीं किया गया।
एक बड़ी बात ये भी सामने आई है कि सर्वे के लिए सिर्फ आईआईटी कानपुर को बुलाया गया जबकि हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी भी यह काम देख सकती थी। इससे हरियाणा की मेक इन इंडिया नीति के नियमों की अनदेखी की गई है।
इतना ही नहीं ज्यादा रेट वाली एजेंसी को टेंडर देकर भी फायदा पहुंचाया गया। आईआईटी कानपुर के जावेद से लगभग दोगुनी कीमत पर कॉन्टैक्ट देकर फायदा पहुंचाने का आरोप है और इससे सरकार को नुकसान हुआ है।
ऐसे में अब एसीबी दोनों आरोपियों को जल्द ही जांच में शामिल करेगी। एसीबी द्वारा मामले से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. बिनानी भट्टाचार्य की उप निदेशक के पद पर नियुक्ति में भी नियमों के उल्लंघन की शिकायत सामने आई है। उन्हें अवैध रूप से कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन दिए गए। पद के लिए जरूरी सात साल पुरातत्व ऑपरेशंस का अनुभव नहीं होने के बावजूद भी बिनानी भट्टाचार्य को 10 साल तक एक्सटेंशन देने का भी मामला सामने आया है।



