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विरोध के बाद अरावली पर नए फैसले से पीछे हटा सुप्रीम कोर्ट, लेकिन इनकी समस्याओं का हल कब होगा ?

Yuva Haryana : देश की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली पर अपनी ही सिफारिश से सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। विरोध के बाद पहले केंद्र ने अरावली में माइनिंग पर कड़ा फैसला लिया और अब सुप्रीम कोर्ट भी अपने नए फैसले से पीछे हट गया है।

हालांकि, अरावली को लेकर नए-नए फैसले जरूर लिए जा रहे है, लेकिन इस प्राचीन पर्वतमाला के आस-पास रहने वाले लोगों की समस्याओं का हल कब होगा और कब अरावली को बचाने के लिए ठोस कदम धरातल पर उठाए जाएंगे ? ये सवाल ज्यों का त्यों पड़ा है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के दिन एक प्रमुख समाचार पत्र में सोमवार को प्रकाशित खबर के अनुसार हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अरावली में माइनिंग पर रोक लगाई जाए अन्यथा वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि माइनिंग के लिए हो रहे ब्लास्टिंग से उनके घरों में दरारें पड़ रही है। भूकंप जैसे हालात उनके क्षेत्र में बने रहते है।

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रविवार को महेंद्रगढ़ के गांव ऊष्मापुर में अरावली की पहाड़ियों में माइनिंग, भारी धमाकों और गांव के पास चल रहे स्टोन क्रेशरों के विरोध में पंचायत की गई।

ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि माइनिंग और स्टोन क्रेशर की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों का ये भी कहना है कि अरावली में नियमों के मुताबिक खनन पर रोक लगनी चाहिए। इसके बावजूद उनके क्षेत्र में पहाड़ों में लगातार माइनिंग जारी है। हाल ये हो चुका है कि तेज धमाके से पूरा गांव कांप उठता है और घरों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी है।

ऐसे में ग्रामीणों ने मांग की है कि उनकी मांग जायज है और प्रशासन कोई ठोस कदम उठाए और खनन कार्य को रोके। इतना ही नहीं, जिन घरों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें प्रशासन की तरफ से मुआवजा मिलना चाहिए।

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ग्रामीणों के अनुसार अरावली में पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यहां माइनिंग के लिए पेड़-पौधे काटे जा रहे है, वन्य जीवों के ठिकानों को नष्ट किया जा रहा है। खनन के चलते यहां उठने वाली धूल से लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही है। लोक खांसी, दमा, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी बीमारियों से परेशान है।

इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से उनकी इन समस्याओं का हल करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अब ग्रामीणों ने पंचायत करके आंदोलन की चेतावनी दी है।

उधर, सोमवार को अरावली मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही सिफारिश को रोकते हुए कहा कि रिपोर्ट लागू होने से पहले या इस कोर्ट के फैसले को लागू करने से पहले मार्गदर्शन देने के लिए एक निष्पक्ष स्वतंत्र प्रक्रिया की जरूरत है।

सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के ही इस मामले पर दिए गए पूर्व के फैसले को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट अब 21 जनवरी 2026 को इस मामले पर सुनवाई करेगा।

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आपको बता दें कि इससे पहले 20 नवंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की एक समान और वैज्ञानिक परिभाषा को मंजूरी दी थी, इसके अनुसार केवल 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा मानने के आदेश दिए थे।

First published on: December 29, 2025 03:45 PM

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