Yuva Haryana: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लगातार बिगड़ती हवा और बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब एनसीआर में शामिल 14 जिलों में किसी भी नए निर्माण या पुरानी इमारत को तोड़ने के बाद निकलने वाले मलबे का पूरा हिसाब देना होगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के आदेश जारी कर दिए हैं।
मलबे की रसीद के बिना नहीं मिलेगा भवन का प्रमाण पत्र
नए नियमों के अनुसार, निर्धारित जगह पर मलबा निस्तारित कराने की रसीद दिखाए बिना भवन का पूर्णता (Completion) या ऑक्यूपेंसी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
200 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट के लिए नियम: 200 वर्ग मीटर या इससे बड़े प्लॉट पर नया निर्माण करने या पुरानी इमारत गिराने पर, निकलने वाले मलबे को अधिकृत केंद्र में ले जाकर उसकी रसीद लेनी होगी। इसी केंद्र में मलबे का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण किया जाएगा।
बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स पर कड़ी नजर: 500 वर्ग मीटर या इससे बड़े निर्माण और तोड़फोड़ के प्रोजेक्ट्स को ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इन पर वीडियोग्राफी के जरिए निगरानी रखी जाएगी और हर 15 दिन में नियमों के पालन की रिपोर्ट देनी होगी। हवा की गुणवत्ता मापने के लिए स्मार्ट सेंसर भी लगाए जाएंगे।
धूल रोकने के लिए कड़े इंतजाम और ढंके हुए वाहन
- निर्माण स्थल की सीमा पर हवा और धूल रोकने के लिए बैरियर लगाने होंगे।
- निर्माण वाले हिस्सों को पर्दों से ढकना और धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव व वॉटर मिस्ट का नियमित इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।
- निर्माण सामग्री और मलबे को ढंककर रखना होगा, साथ ही निर्माण सामग्री को केवल ढंके हुए वाहनों में ही ले जाया जा सकेगा।
किन जिलों में लागू होंगे नियम?
यह निर्देश गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, नूंह, रेवाड़ी, झज्जर, पलवल, भिवानी, दादरी, महेंद्रगढ़ और जींद सहित सभी संबंधित शहरी, औद्योगिक और विकास क्षेत्रों में लागू होंगे।
गुरुग्राम में बड़ी कार्रवाई: 8 आरएमसी प्लांट ध्वस्त
प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर निगम गुरुग्राम ने मंगलवार को भौंडसी, दौलताबाद, भूड़पुर, बहरामपुर और मैदावास क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी करने वाले 8 रेडी मिक्स कॉंक्रीट (आरएमसी) प्लांटों को ध्वस्त कर दिया। इसके अलावा, प्रदूषण फैलाने वाली मानदंडों का पालन न करने पर फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में 50 से अधिक निर्माण साइटों को नोटिस जारी किए गए हैं।
पानीपत देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बना
- दिवाली से पहले हरियाणा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार शाम पानीपत का एक्यूआई (AQI) 274 दर्ज किया गया, जिसके साथ यह देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया।
- एक दिन पहले पानीपत का एक्यूआई 167 था, यानी एक ही दिन में 107 अंकों की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- इसी तरह मानेसर का एक्यूआई भी 128 से बढ़कर 219 पर पहुंच गया।
- हालांकि, राहत की बात यह है कि करनाल (40) और पंचकूला (46) में हवा की गुणवत्ता अभी भी संतोषजनक व अच्छी श्रेणी में बनी हुई है।

