Yuva Hayrna : भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने आरक्षण पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा कि अनुसूचित जातियों को मिलने वाले आरक्षण में क्रीमी लेयर यानी कि आर्थिक-सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके वर्ग को बाहर रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक आईएएस अफसर के बच्चे और एक गरीब किसान-मजदूर के बच्चे को एक ही स्तर पर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
सीजेआई गवई ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले भी इंद्रा साहनी मंडल आयोग मामले के आधार पर यही राय दी थी कि जैसे ओबीसी समुदाय में क्रीमी लेयर की पहचान की जाती है, वैसे ही यह व्यवस्था एससी समुदाय के लिए भी होनी चाहिए, भले ही इस विचार की काफी आलोचना हुई हो।
उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन की प्रक्रिया इसीलिए रखी गई ताकि समय के साथ जरूरतें बदलने पर देश आगे बढ़ सके।
सीजेआई ने कहा कि न्यायाधीशों को आम तौर पर अपने फैसलों का बचाव नहीं करना चाहिए और उनके पास सेवानिवृत्ति तक सिर्फ एक हफ्ता ही बचा है।
सीजेआई ने आगे कहा कि देश में वर्षों के दौरान महिलाओं के अधिकारों और समानता को लेकर जागरूकता बढ़ी है और भेदभाव की पुरानी सोच को पीछे छोड़ा जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि संविधान की वजह से ही आज भारत में दो राष्ट्रपति अनुसूचित जाति से हुए हैं और वर्तमान राष्ट्रपति एक अनुसूचित जनजाति की महिला हैं।



