हरियाणा में भ्रष्टाचार के 70% मामलों में आरोपी बरी, अधूरे सबूत और कमजोर गवाही बनी वजह
Yuva Haryana: हरियाणा में भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने में जांच और अभियोजन की कमजोरियां सामने आई हैं। वर्ष 2023 से 2025 के दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े 210 मामलों में अदालतों ने फैसला सुनाया, जिनमें केवल 63 मामलों में आरोपियों को सजा हुई, जबकि 147 मामलों में आरोपी बरी हो गए। यानी करीब 70.2 प्रतिशत मामलों में आरोपी दोषमुक्त हो गए।
अदालतों के पिछले तीन वर्षों के फैसलों की पड़ताल में सामने आया कि कई मामलों में अधूरे सबूत, कमजोर गवाही, शिकायतकर्ता के मुकर जाने और जांच में कमियों के कारण आरोपियों को लाभ मिला।
रिश्वत के मामलों में भी कमजोर रहा अभियोजन
कई मामलों में रिश्वत लेने के आरोप तो लगाए गए, लेकिन अदालत में आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। कुछ मामलों में शिकायतकर्ता या गवाह के बयान बदलने से भी अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हुआ।
तीन साल में कई जिलों में नहीं हुई सजा
अदालत के फैसलों के आंकड़ों में कुछ जिलों में भ्रष्टाचार के मामलों में सजा की स्थिति बेहद कमजोर रही। वहीं कुछ जिलों में दर्ज मामलों की तुलना में दोषसिद्धि का प्रतिशत बेहतर रहा। आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में केवल केस दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत जांच और ठोस साक्ष्य के साथ प्रभावी पैरवी भी जरूरी है।
सैंपल भेजने में देरी से भी आरोपियों को फायदा
कुछ मामलों में सैंपल भेजने और जांच रिपोर्ट आने में देरी का फायदा आरोपियों को मिला। विशेषज्ञों के अनुसार जांच एजेंसियों को साक्ष्यों की गुणवत्ता, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि बढ़ाने के लिए जांच अधिकारियों और अभियोजन अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय, समय पर साक्ष्य जुटाने और मजबूत केस तैयार करने पर जोर दिया जाना जरूरी है।

