Yuva Haryana : हरियाणा में धान की सरकारी खरीद शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों और सरकार के बीच बुधवार को तीन बिंदुओं पर सहमति बन गई। सहमति के बाद प्रदेश की अनाज मंडियों में वीरवार से धान की सरकारी तौल शुरू करने का फैसला लिया गया। वहीं, शुक्रवार से गेट पास काटने की प्रक्रिया शुरू होगी।
किसानों और प्रशासन के बीच हुई बैठक
कुरूक्षेत्र में किसानों के आंदोलन के बीच खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक डॉ. अंशज सिंह, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन, भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी व अन्य किसान नेताओं के बीच करीब दो घण्टे तक बैठक हुई।
बैठक में सहमति के बाद सहमति बिंदुओं की सार्वजनिक तौर पर जानकारी दी गई। इसके बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
बैठक में क्या तय हुआ ?
बैठक में तय हुआ कि जब तक नियमित धान की खरीद शुरू नहीं होती तब तक किसानों की धान की तौल होती रहेगी। 25 सितंबर से गेट पास कटने शुरू हो जाएंगे। इससे किसानों को दोबारा गेट पास कटवाने की आवश्यकता नही पड़ेगी। पोर्टल भी जल्द शुरू होगा।
25 सितंबर से कटेंगे गेट पास
बैठक में तय हुआ कि जब तक नियमित धान की खरीद शुरू नहीं होती तब तक किसानों की धान की तौल होती रहेगी। 25 सितंबर से गेट पास कटने शुरू हो जाएंगे।

हिरासत में लिए किसानों को छोड़ा
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि हिरासत में लिए गए राकेश बैस, जसवीर मामू माजरा और पवन बैस सहित अन्य किसान नेताओं को रिहा कर दिया गया है।
अगले साल 15 सितंबर से खरीद शुरू करने का आश्वासन
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निदेशक डॉ. अंशज सिंह ने किसान नेताओं को आश्वासन दिया कि अगले साल से केंद्र सरकार को पहले ही पत्र लिख कर 15 सितम्बर से धान की खरीद शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
आपको बतादें कि धान की खरीद शुरू करवाने की मांग को लेकर शाहाबाद-बराड़ा रोड किसानों ने धरना दे दिया था। लगातार दो दिन तक नेशनल हाईवे 44 पर तनाव बना रहा, क्योंकि किसान दिन-रात धरना स्थल पर डटे रहे।
इसके बाद बुधवार को किसान महापंचायत करने के बाद किसान नेताओं ने करीब डेढ़ बजे सरकार को दोपहर डेढ़ बजे तक का अल्टीमेटम देते हुए मांग पूरी न करने पर दोबारा राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 44 को जाम करने का एलान किया। इसके बाद अधिकारी हरकत में आए और बातचीत का दौर शुरू हुआ और करीब दो घंटे बातचीत चली। इसी बैठक में चंडीगढ़ से भी अधिकारी पहुंचे थे, जिसके बाद किसानों और प्रशासन में आपसी सहमति बनी।

