हरियाणा में साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए 738 करोड़ रुपये मंजूर, बनेगा डिजिटल कवच और नया डेटा सेंटर
Yuva Haryana: हरियाणा सरकार ने राज्य को डिजिटल रूप से सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े दो प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए कुल 738 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सरकारी डेटा की सुरक्षा बढ़ाना, ऑनलाइन जनसेवाओं को अधिक भरोसेमंद बनाना और साइबर हमलों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।

15 अक्टूबर को हुई इस पहल के तहत हरियाणा डिजिटल कवच-सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर (H-SOC) और हरियाणा स्टेट डेटा सेंटर 2.0 (HSDC 2.0) स्थापित करने की योजना है। इन परियोजनाओं से राज्य के तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को सुरक्षित और आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।
दो परियोजनाओं पर खर्च होंगे 738 करोड़ रुपये
सरकार ने साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें 269 करोड़ रुपये की लागत से हरियाणा डिजिटल कवच-सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर और 469 करोड़ रुपये की लागत से हरियाणा स्टेट डेटा सेंटर 2.0 विकसित किया जाएगा।
इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य सरकारी विभागों के डिजिटल नेटवर्क, एप्लिकेशन, डेटाबेस और महत्वपूर्ण तकनीकी ढांचे को साइबर खतरों से सुरक्षित रखना है। इसके साथ ही सरकारी सेवाओं की उपलब्धता और विश्वसनीयता में सुधार लाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इन प्रस्तावों पर राज्य स्तरीय आईटी संचालन समिति की 51वीं बैठक में विचार किया गया। इस समिति को IT PRISM के नाम से जाना जाता है। बैठक में डिजिटल प्रशासन और साइबर सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकी ढांचा तैयार करने की दिशा में इन परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना गया।
क्या है हरियाणा डिजिटल कवच ?
हरियाणा डिजिटल कवच राज्य की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार किया जा रहा व्यापक कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य सरकारी नेटवर्क, कंप्यूटर सिस्टम, एप्लिकेशन और डेटाबेस को बढ़ते साइबर हमलों से बचाना है।
हरियाणा डिजिटल कवच-सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर एक केंद्रीकृत निगरानी और नियंत्रण केंद्र के रूप में काम करेगा। यहां साइबर सुरक्षा से संबंधित गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा सकेगी।
इस केंद्र के प्रमुख कार्यों में संभावित साइबर खतरों की जल्द पहचान करना, सुरक्षा घटनाओं की जांच करना और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों के साथ मिलकर कार्रवाई करना शामिल होगा। इससे किसी साइबर हमले या सुरक्षा उल्लंघन की स्थिति में प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल विभिन्न सरकारी विभागों में साइबर सुरक्षा की निगरानी से जुड़ी क्षमताएं अलग-अलग स्तरों पर मौजूद हैं। प्रस्तावित केंद्र इन क्षमताओं को एक साझा व्यवस्था के तहत लाने में मदद करेगा, जिससे विभागों के बीच समन्वय बेहतर हो सकेगा।
हरियाणा स्टेट डेटा सेंटर 2.0 से क्या बदलेगा ?
469 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाला हरियाणा स्टेट डेटा सेंटर 2.0 राज्य के डिजिटल प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। डेटा सेंटर में सरकारी डिजिटल सेवाओं और सूचनाओं को सुरक्षित रखने तथा तकनीकी प्रणालियों के संचालन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा।
आधुनिक डेटा सेंटर से सरकारी एप्लिकेशन और ऑनलाइन सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, राज्य के डिजिटल इकोसिस्टम के विस्तार के लिए भी बेहतर तकनीकी आधार तैयार हो सकेगा।
सरकारी सेवाओं का तेजी से ऑनलाइन होना नागरिकों के लिए सुविधाजनक है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा और सिस्टम की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। नया डेटा सेंटर इन जरूरतों को पूरा करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।
आम लोगों को क्या फायदा होगा?
इन परियोजनाओं से नागरिकों की सरकारी सेवाओं तक ऑनलाइन पहुंच को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साइबर खतरों की समय रहते पहचान होने पर सरकारी सिस्टम में संभावित बाधाओं और डेटा सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम किया जा सकता है।
हालांकि, परियोजनाओं की वास्तविक सफलता उनके समयबद्ध क्रियान्वयन, तकनीकी क्षमता, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और लगातार निगरानी पर निर्भर करेगी। सरकार की इस पहल से हरियाणा में डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने और साइबर सुरक्षा के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार होगा।

