Yuva Haryana: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समाधान शिविरों में शिकायतों के दोबारा खुलने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को शिकायत निवारण व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिकायतों का निपटारा केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों की समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को 10 दिन के भीतर 10-10 नीतिगत सुझाव देने को कहा है, ताकि बार-बार सामने आने वाली जनसमस्याओं का स्थायी समाधान किया जा सके।
समाधान शिविरों में 92,848 शिकायतें पहुंचीं
समाधान प्रकोष्ठ की कार्यप्रणाली की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष समाधान शिविरों में कुल 92,848 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इनमें से 55,365 शिकायतों का निपटारा किया गया। हालांकि, राज्य स्तर पर 5,591 शिकायतें विस्तृत जांच के लिए दोबारा खोली गईं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसी शिकायत को केवल रिकॉर्ड में निपटाया हुआ दिखाने के बजाय यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित व्यक्ति की समस्या वास्तव में हल हुई है या नहीं।
40 हजार शिकायतकर्ताओं से फोन पर किया संपर्क
शिकायत निवारण प्रक्रिया की प्रभावशीलता जांचने के लिए लगभग 40,000 शिकायतकर्ताओं से फोन पर संपर्क किया गया। उनसे पूछा गया कि उनकी शिकायत का समाधान हुआ है या नहीं। इस सत्यापन प्रक्रिया के बाद करीब 11,500 शिकायतों को दोबारा खोलने के बाद उनका निपटारा किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिकायतों की दोहरी जांच व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई वास्तविक हो। केवल शिकायत को निपटाया हुआ दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है। शिकायतकर्ता की संतुष्टि और समस्या का समाधान भी महत्वपूर्ण है।
35 प्रतिशत से अधिक शिकायतें दोबारा खुलने वाले जिलों पर नजर
नायब सिंह सैनी ने उन जिलों के प्रदर्शन में सुधार करने के निर्देश दिए, जहां 35 प्रतिशत से अधिक शिकायतें दोबारा खोली गई हैं। ऐसे जिलों को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी होगी और शिकायत निस्तारण में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे शिकायतों के दोबारा खुलने के कारणों की पहचान करें। यदि किसी विभाग में एक जैसी शिकायतें बार-बार सामने आ रही हैं, तो केवल अलग-अलग मामलों का निपटारा करने के बजाय समस्या की जड़ तक पहुंचकर समाधान किया जाए।
उन्होंने उपायुक्तों को अपने जिलों की स्थिति का विश्लेषण कर ऐसी नीतिगत सिफारिशें भेजने को कहा है, जिनसे आम लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
हर समाधान शिविर में नोडल अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रत्येक समाधान शिविर में एक नामित नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा, ताकि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो।
उपायुक्तों को शिविरों में प्राप्त शिकायतों की व्यक्तिगत रूप से जांच करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि संबंधित उपमंडल मजिस्ट्रेट भी शिकायतों के निस्तारण से पहले उनकी समीक्षा करें।
इसके अतिरिक्त, शिकायत निवारण और कार्रवाई से जुड़ी प्रेस विज्ञप्तियां तथा रिपोर्ट समय पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी जनता तक पहुंचाने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सफाई और अतिक्रमण पर भी सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए सुबह के समय विशेष सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने अवैध अतिक्रमण हटाने पर भी जोर दिया।
इन निर्देशों का उद्देश्य केवल शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि शहरों की साफ-सफाई, सार्वजनिक स्थानों की व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं में सुधार करना है।
प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों से स्पष्ट है कि हरियाणा सरकार शिकायत निवारण व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना चाहती है। जिलों को 10 दिन में नीतिगत सुझाव देने, दोबारा खुलने वाली शिकायतों की समीक्षा करने और समाधान शिविरों में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर विशेष जोर दिया गया है।
अब संबंधित जिलों और विभागों के सामने चुनौती शिकायतों का समय पर और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने की होगी, ताकि लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हो सके।

