Yuva Haryana : देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में जब भी प्रदूषण बढ़ता है तो सारा दोष किसानों के ऊपर लगा दिया जाता है। यहां तक कि सरकारें भी किसानों पर सख्त रुख अपनाती हुई नजर आती है।
ऐसे में प्रदूषण के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बात कही है और प्रदूषण का सारा दोष किसानों के माथे पर मढ़ने को लेकर आपत्ति जताई है।
वायु प्रदूषण के लिए पराली और सिर्फ किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट ने कहा कि कोविड के दौरान लगे लॉकडाउन में भी पराली जलाई गई, लेकिन उस वक्त लोगों ने साफ नीला आसमान देखा, क्यों?
अदालत ने कहा कि हम पराली जलाने पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकि किसानों पर बोझ डालना गलत है, जिनका इस अदालत में मुश्किल से कोई प्रतिनिधित्व है।
ऐसे में इस पर विचार किए जाने की जरूरत है, क्योंकि अन्य कारक भी प्रदूषण बढ़ा रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण के लिए शॉर्ट और लॉन्ग टर्म समाधान खोजने के उद्देश्य से इसे महीने में दो बार सुना जाएगा। अदालत ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर एक रूटीन मामले को नहीं निपटा जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि देश का कोई भी शहर इतनी बड़ी आबादी को समायोजित करने के लिए या यह सोचकर विकसित नहीं किया गया था कि प्रत्येक घर में कई कारें होंगी।
कोर्ट का कहना था कि पराली जलाने को लेकर चल रहा नैरेटिव राजनीतिक मुद्दा या अहम का मुद्दा नहीं बनना चाहिए। दिल्ली की जहरीली हवा के कई कारण है। केंद्र सरकार यह स्पष्ट करें कि कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य एजेंसियों द्वारा तत्काल और लॉन्ग टर्म लेवल पर कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं? अब अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।



