Yuva Haryana : हरियाणा में रोहतक और बहादुरगढ़ में दो बास्केटबॉल प्लेयर्स की पोल गिरने से हुई मौत के बाद प्रदेश की खेल व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल उठ रहे है।
अनेक मीडिया रिपोर्ट्स ने हरियाणा में जंग खाती खेल व्यवस्था को उजागर किया है। ऐसे में स्टेडियमों की बदहाली का मुद्दा गरमाया हुआ है।
एक प्रमुख समाचार पत्र की पड़ताल में सामने आया है कि हरियाणा में 41 खेल स्टेडियमों की मरम्मत और निर्माण कार्य पिछले चार सालों से ठप पड़े है, जबकि करीब 105 करोड़ रुपए सरकारी खातों में घूमकर भी खर्च नहीं हो सके।
खेल विभाग ने यह राशि साल 2022-23 से इंडसइंड बैंक में जमा करनी शुरू की थी, जो अक्टूबर 2025 तक करीब 105 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, लेकिन काम में लगातार देरी पर सीएम नायब सैनी ने 18 अगस्त को हुई बैठक में पूरा बजट लोक निर्माण विभाग को सौंपने के आदेश जारी किए।
इसके बाद खेल विभाग ने पूरी राशि लोक निर्माण विभाग के सरकारी खाते में ट्रांसफर करवा दी, लेकिन अभी तक काम कितना हुआ ? ये पता नहीं चला।
इस बारे में हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम का कहना है कि अब लोक निर्माण विभाग से पूछा गया है कि कहां-कहां टेंडर हुए है और कहां काम शुरू हो गया है ? इस विषय पर जल्द प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
हालांकि, खबर ये भी है कि इससे पहले खेल विभाग ने 13 अक्टूबर को भी लोक निर्माण विभाग को पूरी प्रगति रिपोर्ट भेजने को कहा था, लेकिन इसका जवाब नहीं मिला। अब 24 नवंबर को भी दोबारा रिमांडर भेजा गया है।
आपको बता दें कि 41 स्टेडियमों में 17 जिलों के 18 राजीव गांधी खेल स्टेडियम, गुरुग्राम का ताऊ देवीलाल स्टेडियम सहित कई जिला स्तरीय स्टेडियम शामिल है। मीडिया रिपोर्ट में हैरानी जताई गई है कि खेल मुख्यालय ताऊ देवीलाल स्टेडियम में ही 1.04 करोड़ रूपए की मरम्मत और एप्रन निर्माण का काम 2023 से पेंडिंग पड़ा है।
एक अन्य प्रमुख समाचार पत्र ने भी बदहाल खेल व्यवस्था को उजागर करते हुए खिलाड़ियों की मेहनत को खतरे से हारने की बात कही है। रिपोर्ट में दिखाया गया है कि 48 प्रतिशत स्टेडियम में जिम उपकरण टूटे हुए है। 85 प्रतिशत स्टेडियम के ट्रैक उखड़े हुए है और 85 प्रतिशत ही परिसरों में पोल जंग खा चुके है।
आधे से ज्यादा परिसरों में कोई गार्ड तक तैनात नहीं है। रात में अधिकतर स्टेडियमों में रोशनी तक का प्रबंध नहीं है। अनेक ऐसे स्टेडियम हरियाणा में है, जहां पिछले 20 सालों उनकी सुध नहीं ली गई है। समाचार पत्र ने जिलावार ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए खिलाड़ियों पर मंडराते खतरों को उजागर किया है।
यानी कि दो नेशनल लेवल के खिलाड़ियों की मौत ने प्रदेश की खराब खेल व्यवस्था की पोल खोल दी है।



