Yuva Haryana : सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों और मवेशियों के बढ़ते खतरे पर सख्त रुख अपनाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अहम निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के परिसर से सभी आवारा कुत्तों को हटाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि नसबंदी के बाद इन कुत्तों को उसी इलाके में वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के चलते हरियाणा सरकार की ओर से नसबंदी अभियान भी तेज कर दिया गया है। इस विषय पर हरियाणा सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में 31 अक्टूबर को एक रिपोर्ट दायर हुई है।
आपको बता दें कि हरियाणा के 87 शहरी निकायों में करीब दो लाख 30 हजार 675 आवारा कुत्ते हैं। इनमें 60 हजार 812 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण और टैगिंग की जा चुकी है।
राज्य सरकार ने अपना एक एक्शन प्लान देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी निकायों में जल्द नसबंदी कार्य शुरू होगा। अधिकांश निकायों के टेंडर जारी किए जा चुके हैं जबकि कुछ जिलों में कार्य प्रारंभ भी हो गया है।
2023 के एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियमों के तहत जिन कुत्तों की नसबंदी और टैगिंग की गई है, उन्हें वहीं छोड़ दिया गया है जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
हरियाणा निकाय विभाग ने भी निर्देश जारी किए हैं कि आक्रामक कुत्तों को सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा बल्कि उन्हें विशेष बाड़ों में रखा जाएगा। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और सोसाइटी प्रबंधन को अपने क्षेत्र में लावारिस कुत्तों के लिए आहार की जिम्मेदारी निभानी होगी।
फीडिंग सेंटर भीड़-भाड़ वाले इलाकों, बच्चों के खेल स्थलों और मुख्य द्वारों से दूर बनाए जाएंगे ताकि किसी को असुविधा न हो। भोजन का समय भी इस तरह तय किया जाएगा कि वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों को परेशानी न हो। पशु प्रेमियों को गोद लेने की अनुमति दी जाएगी लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कुत्ता दोबारा सड़क पर न लौटे।
एक अहम जानकारी यह भी सामने आ रही है कि नगर निगम यमुनानगर में 10 साल बाद नसबंदी टेंडर जारी किया गया है। इसी तरह गन्नौर नगर पालिका में पांच साल बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है। इसके अलावा सिवान, करनाल, कलानौर, हथीन, नीलोखेड़ी, खरखौदा, नारनौंद, तरावड़ी, घरौंडा, सिरसा, फरुखनगर, पुंडरी, कुंडली नगर पालिका व रोहतक, गुरुग्राम नगर निगम समेत कई निकायों में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
हरियाणा के 11 जिलों में अब तक लावारिस कुत्तों के लिए आश्रय स्थल नहीं बने हैं जबकि 13 जिलों में नसबंदी का काम रुका हुआ है। स्थिति यह है कि सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और अस्पतालों के पास झुंड में घूमते कुत्ते लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
सिरसा के डबवाली क्षेत्र के गांव बिज्जूवाली की एक निवासी महिला की कुत्ते के काटने के कारण इसी साल 16 जुलाई को मौत हो गई थी।
नारनौल, अंबाला, करनाल, भिवानी, चरखी दादरी, सिरसा, झज्जर, कैथल में कोई आश्रय स्थल नहीं है। रोजाना कुत्ते के काटने के रोहतक में 60, पानीपत में 30 और कैथल में 15 केस आ रहे हैं।
सिरसा में पिछले छह माह में कुत्तों के काटने के 65 मामले सामने आए हैं। सिरसा नगर परिषद ने अभियान चलाकर करीब 266 कुत्तों का बधियाकरण किया था।
रोहतक में आश्रय स्थल में 70 कुत्ते हैं। तीन माह में 1,500 का बधियाकरण हुआ। पीजीआईएमएस में रोजाना औसतन 60 डॉग बाइट केस आ रहे हैं।
पानीपत में रोजाना 30 मामले अस्पताल में पहुंच रहे हैं।
कैथल में रोजाना 15 डॉग बाइट केस दर्ज हो रहे हैं।
सोनीपत में अस्थायी आश्रय स्थल है। रोज 100 से अधिक डॉग बाइट केस आ रहे हैं।
रेवाड़ी और धारूहेड़ा में पहले ही टेंडर हो चुके हैं जमीन और फंड तय हो चुका है।
जींद में आश्रय स्थल बना है। 700 कुत्तों को वैक्सीन लग चुकी है।
कुरुक्षेत्र स्थित मिर्जापुर में बंद स्कूल में अस्थायी आश्रय स्थल है। एक सप्ताह में 50 कुत्ते पकड़े गए।
यमुनानगर के जगाधरी में आश्रय स्थल है।
फतेहाबाद में 2,130 कुत्तों का बधियाकरण हुआ। छह माह में 232 लोगों को रेबीज वैक्सीन लग चुकी है।
भिवानी में एक महीने में 4,300, चरखी दादरी में तीन माह में 2,895, हिसार में तीन माह में 3,000 डॉग के बाइट केस सामने आए।



