Yuva Haryana: हरियाणा की राजनीति में एक नया सियासी समीकरण आकार लेता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस पार्टी से निलंबन की कार्रवाई झेल रहे पाँचों विधायक—शैली चौधरी, रेणु बाला, जरनैल सिंह, मोहम्मद इलियास और मोहम्मद इसराइल—अब लगातार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और हरियाणा सरकार के कार्यक्रमों में खुलकर नज़र आ रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक कार्यक्रमों और स्वतंत्रता दिवस समारोहों तक, इन विधायकों को मंच पर प्रमुख भूमिकाएं दी जा रही हैं। खास बात यह है कि कांग्रेस ने भले ही इन्हें पार्टी से निलंबित कर रखा है, लेकिन राज्य सरकार के कार्यक्रमों में इन्हें विशिष्ट अतिथि (VIP Guest) का दर्जा दिया जा रहा है।
निलंबन के बाद भी विधायकी पर कोई खतरा नहीं
राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के आरोपों में निलंबन का सामना करने के बावजूद, इन विधायकों की विधानसभा सदस्यता पूरी तरह सुरक्षित है।
कानूनी स्थिति: विधायक विधानसभा के सदस्य बने हुए हैं। सदन के भीतर वे अब कांग्रेस के प्रतिनिधि के बजाय ‘अलग सदस्य’ (Independent / Disqualified from party activities) के रूप में जाने जाते हैं।
सदस्यता रद्द क्यों नहीं होती? केवल पार्टी से निष्कासित (Expel) किए जाने पर किसी विधायक की विधानसभा सदस्यता खत्म नहीं होती।
निष्कासन क्यों नहीं कर रही कांग्रेस?
दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया केवल तभी शुरू हो सकती है, जब ये निलंबित विधायक औपचारिक रूप से किसी दूसरी पार्टी (जैसे भाजपा) में शामिल हो जाएं।
- व्हिप लागू नहीं होना: विधानसभा के बाहर हरियाणा सरकार या भाजपा के कार्यक्रमों में भाग लेने पर पार्टी का व्हिप लागू नहीं होता है।
- सख्त कार्रवाई में बाधा: विधायक केवल अपने-अपने क्षेत्रों के सरकारी कार्यक्रमों या मंचों पर भाजपा नेताओं के साथ दिख रहे हैं। कानूनी दृष्टिकोण से, केवल इस आधार पर उनकी विधायकी पर सीधी कार्रवाई करना आसान नहीं है।
- रणनीतिक रुख: निष्कासन करने पर वे पूरी तरह स्वतंत्र हो जाएंगे। यही कारण है कि कांग्रेस उन्हें निष्कासित करने के बजाय सिर्फ निलंबित रखना चाहती है।
उपचुनाव की संभावना फिलहाल कम
यदि किसी कारणवश इन विधायकों की सदस्यता चली भी जाती है, तो राज्य में उपचुनाव (By-election) की संभावना बहुत कम दिखाई दे रही है।
राज्य में भाजपा सरकार का कार्यकाल लगभग दो साल ही बचा है।
सरकार इस समय कोई भी राजनीतिक जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही है।
पार्टी और सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर केंद्रित है। ऐसे में विधानसभा की सीटें खाली होने की स्थिति में भी उपचुनाव कराने में जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
क्या कहते हैं ज़िम्मेदार?
“भाजपा और सरकार के कार्यक्रमों में निलंबित विधायकों की लगातार मौजूदगी से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। पार्टी इन विधायकों की गतिविधियों पर लगातार नज़र रख रही है। जल्द ही इनकी गतिविधियों से संबंधित रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”
— राव नरेंद्र सिंह, अध्यक्ष, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी

