फाइलों में उलझा निर्माण कार्य, तीन साल की गारंटी वाले कोर्ट में चार महीने बाद ही दरारें; खिलाड़ियों को सुविधाओं का इंतजार
Yuva Haryana: हरियाणा में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावों के बीच रोहतक के लाहली स्थित राष्ट्रीय स्तर के खेल स्टेडियम में निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, स्टेडियम में हुए हादसे के करीब 10 महीने बाद भी कुछ निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। वहीं, सांसद निधि से बनाए गए दो सिंथेटिक कोर्ट में भी निर्माण की गुणवत्ता और दरारों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इससे खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं और सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हादसे के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा
लाहली स्थित स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाओं से जुड़े कुछ काम अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। निर्माण कार्य में देरी के कारण खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टेडियम जैसे महत्वपूर्ण खेल परिसर में बुनियादी सुविधाओं का समय पर उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि खिलाड़ी नियमित अभ्यास कर सकें और प्रतियोगिताओं की तैयारी में बाधा न आए।
हादसे के बाद निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की उम्मीद थी, लेकिन रिपोर्ट में बताया गया है कि कई काम अभी भी अधूरे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि संबंधित विभागों की निगरानी और निर्माण कार्य की समयसीमा का पालन किस स्तर पर हो रहा है।
सांसद निधि से बने सिंथेटिक कोर्ट की गुणवत्ता पर सवाल
इन कोर्ट के निर्माण में गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। तीन साल की गारंटी वाले कोर्ट में निर्माण के महज चार महीने बाद ही दरारें दिखाई देने की बात कही गई है।
खेल मैदानों और सिंथेटिक कोर्ट का निर्माण खिलाड़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे स्थानों पर सतह की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि खराब सतह खिलाड़ियों के अभ्यास और खेल प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। यदि निर्माण के कुछ ही महीनों बाद दरारें आ जाती हैं, तो निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों और ठेकेदार की जिम्मेदारी की जांच जरूरी हो जाती है।
हालांकि, दरारें आने के वास्तविक कारणों की पुष्टि तकनीकी निरीक्षण के बाद ही हो सकती है। इसलिए संबंधित विभाग को निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फाइलों में उलझी प्रक्रिया, खिलाड़ियों को इंतजार
निर्माण कार्य से संबंधित प्रक्रियाओं और विभागीय स्तर पर देरी की ओर भी इशारा किया गया है। सरकारी निर्माण परियोजनाओं में स्वीकृति, बजट, टेंडर और तकनीकी मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं होती हैं, लेकिन इन कारणों से काम लंबे समय तक अधूरा नहीं रहना चाहिए।
खेल स्टेडियम में सुविधाओं की कमी का सीधा असर खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ता है। अभ्यास के लिए उचित कोर्ट, सुरक्षित सतह और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं होने पर खिलाड़ियों को वैकल्पिक स्थानों का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे समय और संसाधनों की बर्बादी भी होती है।
निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी की समीक्षा जरूरी
स्टेडियम में अधूरे निर्माण और सिंथेटिक कोर्ट में दरारों की खबर ने निर्माण कार्य की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। संबंधित विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार हो और ठेकेदार की ओर से दी गई गारंटी का पालन कराया जाए।
यदि तकनीकी जांच में निर्माण संबंधी कमी सामने आती है, तो नियमों के अनुसार मरम्मत या दोबारा निर्माण की कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि परियोजना कब तक पूरी होगी और खिलाड़ियों को सुविधाएं कब उपलब्ध कराई जाएंगी।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
रोहतक का लाहली स्टेडियम खेल गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यहां निर्माण कार्य में देरी और कोर्ट की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सांसद निधि से खर्च होने वाली राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हो और काम की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए, यह सुनिश्चित करना जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, स्टेडियम में कुछ निर्माण कार्य अधूरे हैं और सिंथेटिक कोर्ट में दरारों की शिकायत सामने आई है। अब संबंधित विभाग की तकनीकी जांच, मरम्मत और समयबद्ध कार्रवाई से ही स्थिति स्पष्ट होगी। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा हो और गुणवत्ता के मामले में जिम्मेदारी तय की जाए।

