चयन में लिखित परीक्षा, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव को भी देना होगा महत्व; तय मानदंडों के आधार पर ही आंकी जाएगी उम्मीदवार की मेरिट
Yuva Haryana: हरियाणा एवं पंजाब हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों के चयन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती नियमों में इंटरव्यू के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित नहीं हैं और इंटरव्यू के आधार पर स्वतंत्र रूप से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान भी नहीं है, तो चयन समिति किसी उम्मीदवार को केवल ‘उपयुक्त नहीं’ बताकर नौकरी की दौड़ से बाहर नहीं कर सकती।
अदालत ने कहा कि उम्मीदवार की योग्यता और उपयुक्तता का आकलन भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित सभी मानदंडों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और इंटरव्यू के लिए अंक निर्धारित हैं, तो किसी एक घटक को जरूरत से ज्यादा महत्व देकर बाकी मानदंडों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भर्ती के तय नियमों के अनुसार ही होगा चयन
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है। यदि किसी पद के लिए चयन योजना में अलग-अलग मानदंडों के आधार पर अंक देने का प्रावधान है, तो उम्मीदवार की अंतिम योग्यता का आकलन पूरी चयन प्रक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।
अदालत के अनुसार, इंटरव्यू में उम्मीदवार के प्रदर्शन के आधार पर चयन समिति अपनी राय बना सकती है, लेकिन इस व्यक्तिपरक आकलन को भर्ती नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। यदि नियमों में इंटरव्यू के लिए अलग से न्यूनतम अंक या अयोग्य घोषित करने की शर्त नहीं है, तो समिति अपनी ओर से ऐसी शर्त लागू नहीं कर सकती।
यह फैसला उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लिखित परीक्षा, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव जैसे निर्धारित मानदंडों पर अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद केवल इंटरव्यू में अनुपयुक्त बताए जाने के कारण चयन से बाहर हो जाते हैं।
सुपरिंटेंडेंट पद की भर्ती से जुड़ा मामला
यह फैसला एक ऐसे मामले में आया, जिसमें सुपरिंटेंडेंट पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार को इंटरव्यू में ‘नॉट सूटेबल’ यानी अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया था। इसके कारण उसे नियुक्ति के लिए विचार किए जाने वाले उम्मीदवारों की सूची से बाहर कर दिया गया।
मामले में विवाद इस बात को लेकर था कि जब भर्ती योजना में इंटरव्यू के लिए अलग से न्यूनतम अर्हक अंक निर्धारित नहीं थे, तो क्या चयन समिति केवल इंटरव्यू के आकलन के आधार पर उम्मीदवार को अयोग्य घोषित कर सकती है?
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित मानदंडों और निष्पक्षता के महत्व को रेखांकित किया। कोर्ट ने कहा कि चयन समिति को भर्ती नियमों के अनुरूप ही उम्मीदवार की उपयुक्तता का मूल्यांकन करना होगा।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का भी उल्लेख
अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में मनमानी की अनुमति नहीं दी जा सकती। चयन के नियमों में पारदर्शिता और निष्पक्षता होनी चाहिए। इस संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता और सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर के सिद्धांतों का भी उल्लेख किया गया।
कोर्ट के अनुसार, यदि चयन योजना में लिखित प्रदर्शन, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और इंटरव्यू के अंकों को मिलाकर अंतिम मेरिट तैयार करने का प्रावधान है, तो इंटरव्यू को इतना अधिक महत्व नहीं दिया जा सकता कि अन्य मानदंडों का महत्व ही समाप्त हो जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया का उद्देश्य उम्मीदवार की समग्र योग्यता का आकलन करना है, न कि केवल इंटरव्यू के आधार पर उसकी पात्रता का फैसला करना।
उम्मीदवार की दोबारा समीक्षा और मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश
याचिका स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित चयन समिति को उम्मीदवार की उम्मीदवारी पर निर्धारित चयन मानदंडों के अनुसार दोबारा विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि चयन योजना में शामिल सभी घटकों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त मेरिट सूची तैयार की जाए।
इसके बाद उम्मीदवार की उपयुक्तता का मूल्यांकन इंटरव्यू के लिए निर्धारित 20 अंकों के आधार पर किया जाए, लेकिन इंटरव्यू को स्वतंत्र अर्हक चरण मानकर उम्मीदवार को बाहर न किया जाए।
नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए क्यों अहम है फैसला ?
यह फैसला सरकारी और अन्य सार्वजनिक पदों की भर्ती में निर्धारित नियमों के पालन के महत्व को सामने लाता है। इससे स्पष्ट होता है कि चयन प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक मानदंड की भूमिका भर्ती अधिसूचना और चयन योजना के अनुसार तय होगी।
हालांकि, इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हर उम्मीदवार को इंटरव्यू में अच्छे अंक न मिलने के बावजूद नौकरी मिल जाएगी। उम्मीदवार का अंतिम चयन निर्धारित नियमों, कुल अंकों, मेरिट और संबंधित पद की शर्तों के आधार पर ही होगा।
कुल मिलाकर, हरियाणा एवं पंजाब हाई कोर्ट के इस फैसले ने भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता के महत्व को दोहराया है। अदालत का संदेश स्पष्ट है कि चयन समिति को निर्धारित नियमों के भीतर रहकर ही उम्मीदवारों की योग्यता का मूल्यांकन करना चाहिए।

