Yuva Haryana: हरियाणा में नौकरीपेशा लोगों और कामगारों के लिए कार्यस्थल तक का दैनिक सफर काफी महंगा साबित हो रहा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के देश के पहले राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वे (NHTS) के अनुसार, हरियाणा में कामगारों को रोजाना आने-जाने पर राष्ट्रीय औसत के मुकाबले काफी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है खर्च
सर्वे आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा में एक निश्चित कार्यस्थल तक आने-जाने वाला कामगार औसतन ₹1,212 प्रति माह खर्च कर रहा है, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत ₹785 प्रति माह है। यानी हरियाणा के शहरी कामगार देश के औसत से लगभग 54 प्रतिशत अधिक खर्च उठा रहे हैं।
यह स्थिति केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी भारी आर्थिक बोझ देखा जा रहा है:
ग्रामीण हरियाणा: निश्चित कार्यस्थल जाने वाले कामगारों का औसत मासिक खर्च ₹1,048 है, जो राष्ट्रीय ग्रामीण औसत (₹612) से काफी ज्यादा और राष्ट्रीय शहरी औसत (₹1,044) के बराबर है।
अन्य राज्यों की तुलना: दिल्ली में मासिक खर्च ₹2,038, मिजोरम में ₹1,507, लद्दाख में ₹1,531, केरल में ₹1,415 तथा चंडीगढ़ में ₹1,383 है। वहीं पड़ोसी राज्य पंजाब में यह ₹953, राजस्थान में ₹773 और उत्तर प्रदेश में ₹700 प्रति माह है।
सार्वजनिक परिवहन का कम उपयोग, निजी वाहनों पर निर्भरता अधिक
- सर्वे (जुलाई 2025 से जून 2026) के आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा के शहरों में सार्वजनिक परिवहन (बस, ट्रेन, मेट्रो) का इस्तेमाल बेहद कम है।
- शहरी हरियाणा में महज 1% कामगार सार्वजनिक परिवहन से कार्यस्थल पहुंचते हैं, जबकि राष्ट्रीय शहरी औसत 14.2% है।
- इसके विपरीत, प्रदेश में निजी वाहनों पर निर्भरता काफी अधिक है। राज्य के 4% कामगार दोपहिया वाहनों से सफर करते हैं (राष्ट्रीय औसत: 42.6%)।
- कार से जाने वालों का आंकड़ा हरियाणा में 10% है, जो राष्ट्रीय स्तर पर 3% और राष्ट्रीय शहरों में 7% के मुकाबले काफी अधिक है।
कामकाजी महिलाओं पर सफर का दोहरी मार
हरियाणा में कामकाजी महिलाओं के लिए नौकरी तक पहुंचना पुरुषों और देश की अन्य महिलाओं की तुलना में और भी महंगा है:
- हरियाणा की कामकाजी महिलाएं आने-जाने पर औसतन ₹1,129 प्रति माह खर्च करती हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं का यह औसत महज ₹533 है।
- प्रदेश के 7% पुरुष कामगार दोपहिया वाहन का प्रयोग करते हैं, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 20.5% है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में बसें महिलाओं का मुख्य साधन हैं, जहाँ 1% ग्रामीण महिलाएं बस से जाती हैं (राष्ट्रीय औसत: 9.9%)।
- शहरी क्षेत्रों में 3% महिलाएं ऑटो और 15.3% कार से कार्यस्थल पहुंचती हैं।
परिवहन में सुधार की तैयारी: 1,000 नई बसें खरीदी जा रही हैं
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हरियाणा सरकार कदम उठा रही है। परिवहन मंत्री अनिल विज के अनुसार:
- राज्य परिवहन बेड़े में 1,000 नई बसें (500 इलेक्ट्रिक और 500 सामान्य बसें) चरणबद्ध तरीके से शामिल की जा रही हैं।
- औद्योगिक नगरियों, सिविल अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के रूटों पर बसों के फेरे बढ़ाए जा रहे हैं।
- यात्रियों की सुविधा के लिए बसों में रियल-टाइम ट्रैकिंग, मोबाइल ऐप से आगमन की जानकारी और बस स्टैंड्स पर डिजिटल डिस्प्ले जैसी आधुनिक सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।

