Yuva Haryana: हरियाणा में जमीन के बंटवारे (पार्टिशन) और इंतकाल की प्रक्रिया अधिकारियों की सुस्ती, पटवारियों की ढिलाई और स्टाफ की कमी के कारण बुरी तरह लटक गई है। प्रदेश भर के करीब 95 हजार परिवार अपनी जमीनों के न्याय के लिए तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों में दर्ज 1,14,716 मामलों में से पिछले तीन महीनों में महज 18,822 (16.4%) मुकदमों का ही समाधान हो सका है। नतीजा यह है कि 95,894 किसान और नागरिक आज भी इंसाफ के इंतजार में भटक रहे हैं।
क्यों अटक रहे हैं मामले? (देरी की मुख्य वजहें)
तहसीलदार रामनिवास भादू के अनुसार, केस लटकने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
नक्शा बनने पर आपत्ति (एतराज): जमीन बंटवारे के समय नक्शा जारी होते ही दूसरी पार्टी द्वारा आपत्ति दर्ज कराना।
पटवारियों की रिपोर्ट में देरी: गिरदावरी और जमीन की रिपोर्ट समय पर तैयार न होना।
स्टाफ की भारी कमी: तहसीलों में कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों का पर्याप्त संख्या में न होना।
जिलों की स्थिति: कैथल सबसे पीछे, फतेहाबाद अव्वल
फतेहाबाद: 8,652 कुल मामलों में से 4,302 (49.72%) निपटाए गए — प्रदेश में पहला स्थान।
भिवानी: 13,747 कुल मामलों में से 5,044 (36.69%) निपटाए गए।
जींद: 10,114 कुल मामलों में से 1,966 (19.44%) निपटाए गए।
गुरुग्राम: 11,043 कुल मामलों में से 1,709 (15.48%) निपटाए गए।
अंबाला: 10,962 कुल मामलों में से 1,537 (14.02%) निपटाए गए।
करनाल: 10,714 कुल मामलों में से 1,468 (13.70%) निपटाए गए।झज्जर: 12,129 कुल मामलों में से 1,402 (11.56%) निपटाए गए।
चरखी दादरी: 3,113 कुल मामलों में से 193 (6.20%) निपटाए गए।
हंसी: 4,57 कुल मामलों में से 241 (5.27%) निपटाए गए।
फरीदाबाद: 5,831 कुल मामलों में से 277 (4.75%) निपटाए गए।
हिसार: 14,312 कुल मामलों में से 448 (3.13%) निपटाए गए (13,864 पेंडिंग)।
कैथल: 9,526 कुल मामलों में से महज 235 (2.47%) निपटाए गए (9,291 पेंडिंग) — प्रदेश में सबसे खराब स्थिति।
केस लटकने से किसानों और परिवारों पर असर
सरकारी योजनाओं का नुकसान: कागजात समय पर न बनने से किसान सरकारी योजनाओं और बैंक फसल ऋण (Crop Loan) का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।
पारिवारिक रिश्तों में दरार: लंबी अदालती प्रक्रियाओं के चलते परिवारों के बीच मनमुटाव बढ़ रहा है।
आर्थिक नुकसान: वकीलों की भारी-भरकम फीस चुकाने में किसानों की गाढ़ी कमाई बर्बाद हो रही है।
इन उदाहरणों से समझिए न्याय का इंतजार:
हरिता गांव (हिसार): सुंदर सिंह और लिछमा देवी का पार्टीशन केस 2013 से चल रहा है, जहां सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है।
कालवास गांव: पटेल और देवीलाल के बीच 2017 से विवाद जारी है, हर बार तारीख लौट जाती है।
जगान गांव: कृष्ण और परमेश्वरी देवी का तकसीम विवाद पिछले 4 सालों से कोर्ट में है, सुनवाई पूरी होने के बावजूद एसडीएम कोर्ट का फैसला नहीं आया है।

