इस साल कब है होली? जानिए होलिका दहन का मुहूर्त और पूजा विधि

Sahab Ram
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Yuva Haryana : होली, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक, अब अपने आगाज की तैयारियों में है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है, जिसे हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार होली का पावन पर्व 24 मार्च को है, जब होलिका की दहन की जाएगी, और इसे अगले दिन, 25 मार्च, को रंगों की होली खेली जाएगी।

वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा 24 मार्च को सुबह 9:54 मिनट से शुरू हो रही है, जो 25 मार्च को दोपहर 12:29 मिनट पर समाप्त होगी। इस अवसर पर होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 24 मार्च को रात 11:15 मिनट से शुरू होकर 25 मार्च को 12:23 मिनट तक है। होलिका दहन रात के समय किया जाता है, और इस दिन सूर्य उदय के बाद सभी काम करने के बाद स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर लेते हैं।

होलिका दहन के लिए तैयारी के दौरान सबसे पहले होलिका माता की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद, बागवानी में थोड़ा सा जल चढ़ाया जाता है और फिर फूल-माला, रोली, अक्षत, गेहूं की बालियां, मूंग की दाल, भोग लगाया जाता है। इसके बाद, घी का दीपक जलाकर कच्चा सूत होलिका के चारों ओर घूमाकर पंच या सात परिक्रमाएं की जाती हैं।

पूजा विधि:

-होली की पूजा के लिए सबसे पहले होली की जगह को साफ कर लें।
-होली की जगह पर गेहूं की बालियां, गन्ने की छिलके, लकड़ी, चना, मूंगफली, दही, रोली, चावल, फूल, दीपक और अगरबत्ती रखें।
-होली की जगह पर होलिका और प्रह्लाद की मूर्ति स्थापित करें।
-होली की मूर्ति को नारियल, गुड़, रोली और चावल अर्पित करें।
-होली की मूर्ति के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
-होली की मूर्ति की आरती करें।
-होली की मूर्ति के चारों ओर परिक्रमा करें।
-होली की मूर्ति के सामने बैठकर भगवान विष्णु और प्रह्लाद की आरती करें।
-होली की मूर्ति के सामने प्रार्थना करें।
-होली की मूर्ति के सामने भोग लगाएं।
-होली की मूर्ति के सामने बैठकर होली के गीत गाएं।
-होली की मूर्ति के सामने बैठकर होली की कहानी सुनें।

होली की पूजा के बाद होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन के बाद लोग होली खेलते हैं।
होली का त्योहार बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है।होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

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