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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का कारनामा, शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर उठे सवाल

Yuva Haryana News, Chandigarh, 07 Aug. 2020 हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का ऐसा कारनामा सामने आया है जिसने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, बोर्ड ने 10 वीं एक छात्रा के गणित की परीक्षा में केवल 2 अंक दिए। जबकि रि- चैकिंग में उसे...


हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का कारनामा, शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर उठे सवाल

Yuva Haryana News, Chandigarh, 07 Aug. 2020

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का ऐसा कारनामा सामने आया है जिसने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, बोर्ड ने 10 वीं एक छात्रा के गणित की परीक्षा में केवल 2 अंक दिए। जबकि रि- चैकिंग में उसे 100 में से 100 अंक मिलें। शिक्षा बोर्ड का यह भद्दा मजाक गांव चौधरीवास की रहने वाली दिव्यांग छात्रा सुप्रिया के साथ हुआ है।

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सुप्रिया के अन्‍य सभी विषयों में 90 फीसद से ऊपर अंक हैं। गणित में दो नंबर देखकर सुप्रिया हैरान रह गई और परेशान रहने लगी। सुप्रिया के पिता छाज्जू राम निजी स्कूल में गणित के शिक्षक हैं। उन्हें भी सुप्रिया के नंबरों पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने खुद पेपर के विषय में सुप्रिया से जानकारी ली थी और उसके सभी प्रश्नों के उत्तर ठीक थे।  इसके बाद सुप्रिया के पिता ने री-चेकिंग का फार्म भरा। अब सुप्रिया के 100 में से 100 अंक आए हैं।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का कारनामा, शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर उठे सवाल

गरीबी की मार झेल रही सुप्रिया को बोर्ड के कई चक्कर काटने और फार्म भरने में परिवार के करीब पांच हजार रुपये खर्च हो गए। पिता छाज्जू राम ने बताया कि बोर्ड की लापरवाही के कारण उनको आर्थिक नुकसान तो हुआ ही साथ ही पूरे परिवार को मानसिक रूप से परेशानी अलग से हुई। री चेकिंग का फार्म भरने के बाद सुप्रिया ने बोर्ड की परीक्षा में हिंदी में 91, अंग्रेजी में 99, गणित में 100 में से 100, SOS में 89, SCT में 98 और MHV में 99 अंक आए हैं। उसने 500 में से कुल 489 अंक हासिल किए है।

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सुप्रिया की आंखों की रोशनी काफी कम है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए नियम है कि वह परीक्षा में अपने साथ राइटर ले जाते हैं। गणित के पेपर सभी विषयों से अलग होते हैं। इसमें A,B और C कोड के प्रश्न पेपर आते हैं। राइटर का काम प्रश्न बोलना और परीक्षार्थी जो उत्तर देता है, वह लिखना होता है। छाज्जूराम ने बताया कि सुप्रिया की गणित की उत्तर पुस्तिका नार्मल विद्यार्थियों के साथ चेक कर दी गई जिसके कारण उसके उत्तर अलग दिखे और उसे महज दो नंबर ही मिल पाए। पिता ने बताया कि जब उन्होंने सुप्रिया की उत्तर पुस्तिका निकलवाई तो पता चला कि इसके सभी उत्तर ठीक हैं।