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जानिए देश को मिलने वाली पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के बारे में: घर पर बच्चों को बुलाकर पढ़ाती थीं, गांववाले उन्हें मां कहकर बुलाते हैं
 

रायरंगपुर का माहुलडीहा गांव, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से 287 किलोमीटर और मयूरभंज जिला मुख्यालय से 82 किलोमीटर दूर है. करीब छह हजार की आबादी वाले इस गांव में हर किसी के चेहरे पर मुस्कान और गर्व है. पूरे गांव में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. मंगलवार शाम तक सामान्य रहा गांव का जोश अब देखने को मिल रहा है. इसका कारण है द्रौपदी मुर्मू. जैसे ही भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया, उन्हें बधाई देने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी.

प्रमुख हिंदी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार लौह अयस्क (लौह अयस्क) के लिए प्रसिद्ध रायरंगपुर तहसील से 25 किमी दूर जैसे ही एक पक्की सड़क मिलती है, जो सीधे माहुलडीहा गांव की ओर जाती है। यहां पहुंचने के रास्ते में बीच में जंगल भी है. गांव में कुछ घर कच्चे हैं तो कुछ पक्के. यहां मूलभूत सुविधाओं की कोई कमी नहीं है. पूरा गांव डिजिटल सुविधाओं से लैस है.

द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. वह 24 जून को राष्ट्रपति चुनाव के लिए एनडीए उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल करेंगी.   झारखंड की राज्यपाल के रूप में द्रौपदी मुर्मू के किस्से सुनाते हुए कुछ लोगों ने कहा, 'वह इतनी विनम्र और मिलनसार हैं कि मत पूछो. रांची राजभवन में गांव के लोग जमीन विवाद को निपटाने के लिए राशन कार्ड बनवाने पहुंच जाते थे. इसके बावजूद उन्होंने हमें कभी निराश नहीं किया. हर संभव मदद की. वह हर छोटी-बड़ी मुसीबत में हमेशा अपने क्षेत्र के लोगों के साथ खड़ी रहीं.


स्थानीय लोगों ने कहा, 'उनकी निजी जिंदगी परेशानियों से भरी रही. लेकिन उन्होंने इसका असर सार्वजनिक जीवन पर नहीं पड़ने दिया. पति और दो बेटों के आकस्मिक निधन के बाद भी उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही. उनके घर के दरवाजे गरीब और आम आदमी के लिए हमेशा खुले रहते. बीजद-भाजपा सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र में पुलों और सड़कों का निर्माण किया, वहीं बालिकाओं की सुविधा के लिए स्कूल भी खोले. अपने गांव को डिजिटल गांव के रूप में विकसित करें. इसके साथ ही उन्होंने कई बार लोगों की व्यक्तिगत रूप से आर्थिक मदद भी की.

स्थानीय निवासी शुभदीप प्रधान ने बताया कि, 'जिस तरह झारखंड की राज्यपाल रहते हुए द्रौपदी मां के दरवाजे लोगों के लिए खुले रहे, उसी तरह हम उम्मीद करते हैं कि देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनकी उसके लिए दरवाजे खुले रहेंगे.

झारखंड की कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू के साथ काम कर चुकीं कोल्हान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. शुक्ल महंती ने कहा, ''यह सभी महिलाओं के लिए सम्मान की बात है. हम आज सही मायने में महिला दिवस मना रहे हैं।

गांव के अर्जुन मुर्मू ने कहा, 'जन प्रतिनिधि के तौर पर द्रौपदी मुर्मू ने इलाके में काफी काम किया. गांव में पानी उपलब्ध कराने से लेकर सड़कों के विकास तक. शौचालय बनवाया. लोगों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया. राजनीति में आने से पहले वह गांव के बच्चों को अपने घर बुलाकर पढ़ाती थीं.