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12 साल पहले मर चुका युवक हुआ जिंदा, सजा से बचने के लिए बनवाया फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, ऐसे हुआ खुलासा
 

अपने पुर्नजन्म या मृत व्यक्ति को अचानक जिंदा होने के मामले तो देखें होंगे लेकिन कभी सुना है कि 12 साल पहले मर चुका इंसान अचानक जिंदा हो गया। शायद नहीं लेकिन ऐसा एक मामला सामने आया है हरियाणा के सोनीपत से।

सोनीपत के प्रेम नगर में रहने वाले संजय नाम के युवक पर कई मामलों में न्यायालय में कार्रवाई चल रही थी। लेकिन 12 साल पहले संजय की मौत हो गई थी लेकिन अब शहर के विकास नगर के रहने दिल्ली अग्निशमन विभाग में कार्यरत भंवर सिंह की शिकायत से खुलास हुई कि आरोपी जिंदा है।

आरोपी संयय ने परिजनों के साथ मिलकर अपना फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर बड़ी चालाकी से न्यायालय में चल रहे मामलों में खुद को मृत घोषित करा लिया। और हैरानी की बाच है कि उसके बाद आरोपी नगर निगम में निजी कंपनी के वाहन पर चालक की नौकरी करता रहा।

मामला सामने आने के बाद से जिम्मेदार अफसर खुद को बचाने के प्रयास में जुट गए हैं। एएसपी की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद आरोपी व उसके परिजनों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

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बता दें कि भंवर सिंह ने डीसी को शिकायत देकर बताया कि उसकी जानकारी के अनुसार प्रेम नगर का संजय कागजों में मृत है। संजय मूलरूप से नकलोई गांव का रहने वाला है। उस पर उत्तराखंड में एक्साइज एक्ट के दो, गैंगस्टर एक्ट का एक, धोखाधड़ी का एक और मोटर व्हीकल एक्ट के मामले वर्ष 2007 व 2008 में दर्ज हुए थे।

आरोपी संजय मामलों में जमानत कराकर गायब हो गया था। उसके खिलाफ जुलाई 2012 में गैर जमानती वारंट जारी किया जो सदर थाने में पहुंचा। इसके जवाब में जिले के अधिकारियों ने आरोपी संजय को मृत घोषित किए जाने की रिपोर्ट भेज दी।

भंवर सिंह ने आरोप लगाया कि आरोपी ने बड़ी चालाकी से व्यवस्था के लचीलेपन का दुरुपयोग किया और नगर निगम से अपना मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया। एएसपी की जांच में आरोपी के जीवित होने और फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाकर न्यायालय में पेश करने की पुष्टि हो गई। इसके बाद सिटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। 

पुलिस ने बताया कि सजा से बचने के लिए संजय के भाई नरेंद्र कुमार ने नगर निगम व सामान्य अस्पताल में अपने भाई संजय की 28 जुलाई, 2009 में मौत होने की सूचना दे दी। उसने नप से 18 जनवरी, 2011 को अपने भाई संजय का मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया और उत्तराखंड कोर्ट में जमा करा दिया।

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मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर न्यायालय के मामले बंद कर दिए गए। औरप आरोपी संजय नगर निगम में ठेका कंपनी में चालक की नौकरी करने लगा। उसने अपना वोटर कार्ड दूसरे पते पर बनवा लिया। भंवर सिंह ने उत्तराखंड न्यायालय से सत्यापित प्रति लाकर नगर आयुक्त, डीसी और एसपी को सौंपी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।

उसके बाद भंवर सिंह ने सीएम विंडो पर शिकायत की। तब एसपी ने एएसपी उपासना को जांच सौंपी। उनकी जांच में सामने आया कि न्यायालय की कार्रवाई से बचने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया। जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपी संजय, उसकी पत्नी रितु, संजय के भाई नरेंद्र और नरेंद्र की पत्नी माया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। लेकिन आरोपी फरार है।

सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के आधार पर फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने में जिनका नाम सामने आएगा, उनकी भूमिका का पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी। - इंस्पेक्टर सुखबीर सिंह, थाना प्रभारी सिटी सोनीपत

मामला संज्ञान में आने पर मृत्यु प्रमाणपत्र को निरस्त करा दिया है। इस मामले की सूचना हमारी तरफ से ही पुलिस को दी गई है। - मुकेश सरोहा, सब रजिस्ट्रार, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र