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यूजीसी ने नेशनल हायर एजुकेशन क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क में किया बदलाव, अब बीच में छोड़ी पढ़ाई सात साल तक कर सकेंगे पूरी
 


नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में कई बदलाव किए गए हैं. यूजीसी ने राष्ट्रीय उच्च शिक्षा योग्यता ढांचे को 5 से 10 के स्तर को 4.5 से घटाकर 8 कर दिया है. यह फ्रेम वर्क ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक लागू होगा. देश भर में उच्च शिक्षा में अब सीखने के परिणामों के आधार पर एक समान योग्यता ढांचा होगा.

पहले यह 5 से 10 के स्तर पर था. यह अब 4.5 से 8 के स्तर तक किया जा रहा है. इस ढांचे से छात्रों को लाभ मिलेगा. स्कूलों की तर्ज पर अब उच्च शिक्षा का भी आकलन हर साल लॉगइन रिजल्ट के आधार पर होगा. इसमें छात्रों की स्किल, नॉलेज टेस्ट के आधार पर आकलन किया जाएगा कि उनमें सीखने की क्षमता कितनी है. छात्रों को अपना काम शुरू करने के लिए रोजगार या प्रशिक्षण भी मिलेगा.

इसके लिए यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी. इस नीति के बाद, छात्रों को दोहरी डिग्री और संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. अगर छात्र पढ़ाई के बीच कोई फील्ड और कोर्स का विकल्प चुनते हैं तो दिक्कत होती है. इसके बाद चार वर्षीय कार्यक्रम में शोध से लेकर प्रत्यक्ष कार्यक्रम में प्रवेश-निकास की सुविधा मिलेगी.

अब छात्र पढ़ाई बीच में छोड़कर अपनी मर्जी से कोर्स बदल सकेंगे। इसके अलावा छात्र जहां से पढ़ाई छोड़ी थी, वहां से 7 साल के भीतर दोबारा शुरू कर सकेंगे। अब अगर कोई छात्र दोहरी डिग्री और संयुक्त डिग्री कार्यक्रम की पढ़ाई के लिए किसी विदेशी विश्वविद्यालय में जाता है, तो उसे कोई समस्या नहीं होगी। यूजीसी के इस एनएचईक्यूएफ में बदलाव से भारतीय उच्च शिक्षा में समान होगा क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क, अब तक अलग-अलग लेवल के क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क के चलते अब तक स्टूडेंट्स डुअल डिग्री में एडमिशन नहीं ले पाते थे.