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ड्राइवरों की इन दो छोरियों ने कर दिखाया कमाल, खेलो इंडिया यूथ गेम्स में बनाया नया रिकॉर्ड
 

माहरी छोरी छोरों से कम ना है यह मिसाल तो आप सभी ने सुनी होगी इस मिसाल पर झज्जर की दो बेटियों ने नाम कर दिखाया। हम बात कर रहे है झज्जर की उन दो बेटियों की जिन्होंने पहले ही प्रयास में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में पदक जीतकर नेशनल में नया रिकॉर्ड भी बना दिया। झज्जर के दो ड्राइवरों ने क्या खूब कहा की नाम करें न करें बेटे, पर नाम कमा एक दिन पिता का सिर फक्र से उठाती हैं बेटियां..। 

दोनों ही बेटियां झज्जर की रहने वाली थी इनके पिता सुरेश और संजय दोनों सर्दी गर्मी या प्रसाद में गाड़ी सड़कों पर दौड़ आते हैं। वही दोनों के पिता का कहना है की वह खुद की कमियों से समझौता कर लेते हैं लेकिन अपनी बेटियों को कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने देते। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कमी से अपनी बेटियों को सामने नहीं करने दे सकते ताकि उनका ध्यान अपनी मंजिल से ना हटे। वह उनकी छोटी से लेकर बड़ी चीजों तक का ध्यान रखते है। अब सपना है कि बेटियां ओलंपिक में पदक लेकर आएं, ताकि देश के साथ राज्य का भी नाम रोशन हो सके।   

विजेता सोनाक्षी के पिता ने बताया की उनकी बेटी झज्जर निवासी ड्राइवर पिता सुरेश ने बताया कि उसकी बेटी 64 किलो भारवर्ग के वेट लिफ्टिंग के स्नैच में 80 किलो वजन उठाकर तमिलनाडु की वाई. पूकनश्री का नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है। यह उनकी बेटी का पहला प्रयास था और पहले ही प्रयास में उन्हें रजत पदक हासिल कर लिया। इससे पहले भी सुनाक्षी स्टेट चैंपियन रह चुकी है।

वहीं भावना के ड्राइवर पिता संजय कुमार ने बताया कि 59 किलो भारवर्ग में उसकी बेटी ने स्नैच में 81 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ नया नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया है। उसने पश्चिम बंगाल की सुकर्णा एडक का 80 किलो का रिकॉर्ड तोड़ा है। यह रिकॉर्ड उन्होंने बोधगया में बनाया था। संजय ने बताया कि उसकी बेटी 12वीं की छात्रा है, वह खेल के साथ पढ़ाई में भी अव्वल है। उसने कभी 80 फीसदी से कम अंक अर्जित नहीं किए हैं।     

झज्जर में रहने वाली भावना और सोनाक्षी दोनो ही जसोरखेड़ी में कप्तान पहलवान के पास ट्रेनिंग करती थी। इस ट्रेनिंग सेंटर में से 4 बच्चो ने हिस्सा लिया था,जिसमे से दो की जीत हुई और उन्होंने पदक हासिल किया। अगर बात करें इनके रुझान  की तो सोनाक्षी का रुझान अपनी बहन को देखकर ज्यादा वेटलिफ्टिंग की तरफ हुआ।

 वही भावना झज्जर के इसी गांव की रहने वाली थी उनका रुझान यहां पर रह रहे लड़कों और लड़कियों को देखकर वेटलिफ्टिंग की प्रति ज्यादा हुआ। सोनाक्षी की बुआ की बेटी जिसकी वजह से सोनाक्षी का रुझान वेटलिफ्टिंग की तरफ हुआ। वह इस समय सीआरपीएफ में तैनात है। सोनाक्षी के घर से बात करें ट्रेनिंग सेंटर की तो वह करीब 4 से 5 किलोमीटर की दूरी पर है। सोनाक्षी सुबह और शाम रोजाना ट्रेनिंग के लिए जाती है।