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निकाय चुनाव में प्रचार करने का अंदाज हुआ कुछ खास, प्रत्याशियों ने खुद को वीआईपी दिखाने की करी कोशिश
 

निकाय चुनाव के प्रचार के बीच कई तरह के रंग देखने को मिल रहे हैं। जब प्रत्याशी बिना किसी  तामझाम के और देसी अंदाज में ही प्रचार करते थे, लेकिन अब चुनाव हाईटेक हो गया है तो मतदाताओं पर प्रभाव छोड़ने के लिए प्रत्याशी खुद को वीआईपी दिखाने की कोशिश भी कर रहे हैं। चुनाव में जरूरत पर उम्मीदवारों को सुरक्षा दिए जाने की व्यवस्था तो होती है लेकिन अब खास बात यह है कि प्रत्याशी अपनी निजी सुरक्षा लेकर चल रहे हैं। ऐसे प्रत्याशियों को इर्द-गिर्द इन दिनों  सुपारी सूट पहने डील डौल वाले सुरक्षाकर्मी नजर आ रहे हैं।

विधानसभा चुनावों में तो इस तरह का ट्रेंड देखने को मिलता है, मगर इन दिनों तो वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ने वाले भी इस अंदाज में दिख रहे हैं। अब सोसाइटी कंपनियां उम्मीदवारों को बाउंसर उपलब्ध करवा रही है। किसी वार्ड पार्षद के उम्मीदवार के साथ बाउंसरों को देख मतदाताओं के मन में यह सवाल तो उठ रहा है, कि इतने तामझाम की  आखिर उन्हें जरूरत क्या है। इस पर उम्मीदवार भी तर्क देते हैं। उनका कहना है कि चुनाव में हर तरह के लोग सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए किसी तरह के विवाद या तकरार से बचने के लिए सुरक्षा जरूरी है।‌वैसे तो मतदाताओं की अपनी इच्छा होती है कि वह जिसे चाहे वोट दें, लेकिन उम्मीदवार हर मतदाता के पास पहुंचने की कोशिश करता है। ऐसे में कोई जगह प्रतिबंधित उम्मीदवार के समर्थन होते हैं।‌वहां पर सुरक्षा की जरूरत पड़ती है।  खैर उम्मीदवारों को तो अपने तर्क हैं, लेकिन माना यही जा रहा है कि खुद को हैवीवेट कैंडिडेट फील कराने के लिए उम्मीदवार इस तरह के प्रपंच भी कर रहे हैं।


ताकि जब वह प्रचार के लिए निकले तो मतदाताओं पर एक प्रभाव भी पड़े और उनके वीआईपी होने का एहसास भी हो। यह कहीं न  कहीं प्रचार में आगे निकलने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।  अब देखना यह है कि मतदाताओं द्वारा ऐसे उम्मीदवारों को कितना समर्थन दिया जाता है।