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शेरों का मचा धमाकेदार शोर, अशोक स्तंभ की प्रतिकृति पर विपक्ष ने उठाए सवाल करी राजनीति
 

नए सांसद भवन के केंद्रीय कक्ष के शिखर पर लगाए गए राष्ट्रीय चिन्ह के शेरों की मुद्रा को लेकर भले ही विपक्ष राजनीति कर रहे हो, लेकिन देश के लोग बड़ी संख्या में इस चिन्ह की प्रशंसा कर रहे हैं। लोग अपने तर्कों से विपक्ष के आरोपों का भी जवाब दे रहे हैं।और राष्ट्रीय चिन्ह की इस विशाल प्रतिकृति को विश्व में भारत के गौरव और पहचान का प्रतीक भी बता रहे हैं। लक्ष्मी एम पुरी ने इंटरनेट मीडिया मंच पर लिखा है और भारतीय शेर दहाड़ रहा है।  कोलोसल लायन कैपिटल लोकतंत्र के नए मंदिर के शिखर पर लगा महान भारतीय सभ्यता और स्वाधीन भारत का परिचय चैन विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और एक नए व आत्मविश्वास से भरे भारत की सांसद। वही जोगलेकर सौरभ नाम के अकाउंट से लिखा गया है कि शेर स्वभाव से योद्धा होता है, निर्भय होता है और भारत स्वाधीन और वीर लोगों की धरती है। अनुराग राठौर ने शेरों को आक्रामक बताए जाने पर ट्विटर पर जवाब दिया है कि हां, भारत एक निर्भय और स्वाभिमानी देश है।

घोस्टराइडर नाम के अकाउंट से इस प्रतिकृति की फोटो शेयर करने के साथ लिखा गया कि भारत यानी इंडिया अब टूथलेस टाइगर नहीं है। 2 दिन से इंटरनेट मीडिया पर छाया मुद्दा इंटरनेट मीडिया पर बीते 2 दिन से राष्ट्रीय चिन्ह की प्रतिकृति में शेरों की मुद्रा को लेकर विवाद चल रहा है। विपक्ष के नेता आरोप लगा रहे हैं कि शेरों को आक्रामक बनाया गया है। सरकार ने इस आरोप का पुरजोर खंडन किया है और साथ ही वह कारण भी बताए हैं जिनके कारण शेरों की मुद्रा में बदलाव का भ्रम हो रहा है।