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40 करोड़ के पार पहुंचा हरियाणा के बिजली निगम का फर्जीवाड़ा ,एक्सईएन के साथ अन्य कर्मी हुए गिरफ्तार
 

बिजली निगम से सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पैसा निकालकर फर्जीवाड़ा करने के मामले में गिरफ्तार अकाउंटेंट पूजा को निलंबित कर दिया गया है। इस फर्जीवाड़े में अब तक एक्सईएन सहित सात कर्मी निलंबित हो चुके हैं। अभी और भी कर्मियों की गिरफ्तारी हो सकती है, क्योंकि आरोपितों से पूछताछ के बाद कंप्यूटर ऑपरेटरों तक के नाम सामने आ गए हैं। वहीं जगाधरी डिवीजन का आडिट चल रहा है। जिसमें अभी तक करीब 40 करोड रुपए का फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। यह आडिट  इस महीने के अंत तक पूरा हो सकता है। 


यह फर्जीवाड़ा पानीपत में दर्ज केस के बाद उजागर हुआ था। समालखा निवासी टैक्सी चालक के खाते में बिजली निगम के खाते से पैसे ट्रांसफर हुए थे। मामले की जांच के दौरान पानीपत की पुलिस ने सुबूत जुटाए थे और तत्कालीन एक्सईएन बिलासपुर नीरज सिंह, डिविजनल अकाउंटेंट योगेश लांबा को गिरफ्तार किया। अभी पानीपत पुलिस की तफ्तीश चल रही है। जिसमें एक्सईएन से लेकर एलडीसी राघव, अकाउंटेंट पूजा सहित अन्य की गिरफ्तारी हो चुकी है।

वहीं गिरफ्तारी से पहले ही एक्सईएन नीरज सिंह ने बिलासपुर थाने में शिकायत दे दी थी। जिसमें उनसे डिविजनल अकाउंटेंट योगेश लांबा, एलडीसी राघव डिप्टी, सुपरिटेंडेंट नंदा और समालखा में तैनात डिप्टी सुप्रिडेंट चक्रवर्ती शर्मा पर फर्जी वाउचर  के जरिए 63 लाख रुपए के गबन का आरोप लगाया था। यह केस दर्ज होने के बाद चक्रवती शर्मा ने आत्महत्या भी कर ली थी। वही एक  मामला शहर यमुनानगर थाने में एक्सईएन जगाधरी भूपेंद्र सिंह की शिकायत पर राघव वधावन  और योगेश लांबा पर 21 लाख रुपए के वाउचरों के जरिए फर्जीवाड़ा करने का दर्ज हुआ है। दोनों केसों को जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा में ट्रांसफर किया गया है।


यह फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद जगाधरी डिवीजन का वर्ष 2016 से लेकर वर्ष 2021 तक का आडिट किया जा रहा है। बिलासपुर डिवीजन का छह माह का आडिट हुआ था, क्योंकि यह डिवीजन नई बनी थी। पहले बिलासपुर को जगाधरी डिवीजन से ही कामकाज चलता था। बिलासपुर डिवीजन में एक करोड़ 40 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा पकड़ में आ चुका है।

पानीपत की पुलिस ने फर्जीवाड़ा के मुख्य आरोपित एलडीसी राघव वधावन को गिरफ्तार कर लिया था। उसके पकड़े जाने के बाद कई अन्य कर्मियों के नाम सामने आए थे। इनमें अकाउंटेंट पूजा, सोनू,  अतुल और मनहर सैनी के नाम शामिल थे। फर्जीवाड़े का पैसा इन आरोपों के पास भी गया था। जिस पर पुलिस ने इन्हें  गिरफ्तार कर लिया था। कुछ अन्य कर्मियों पर भी तलवार लटक रही है। इसमें उस समय तैनात रहे एक्सईएन तक भी लपेट में आ सकते हैं। बिजली निगम के राजेंद्र कुमार ने बताया है, कि अभी जगाधरी डिवीजन का आडिट चल रहा है। अब तक 40 करोड़ तक का गबन पता चला है। उम्मीद है कि इस माह के अंत तक यह अडिट पूरा हो जाएगा। इसके बाद गबन की पूरी राशि का पता लग जाएगा