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प्रदेश के मॉडल स्कूलों की हालत खस्ता, बच्चों को शिक्षा तो दूर मूलभूत सुविधाएं तक नहीं
 
प्रदेश के मॉडल स्कूलों का आलम यह है कि उनमें न तो स्टाफ पूरा है, बैठने के लिए पूरे कमरे नहीं हैं और न ही अन्य सुविधाएं हैं. सरकार का दावा है कि सभी मॉडल स्कूलों में डिजिटल बोर्ड लगे हैं, फ्री वाईफाई सुविधा है, इंग्लिश मीडियम पढ़ाया जाता है, छात्रों के बैठने के लिए ड्यूल डेस्क की सुविधा है. इनमें से अधिकतर स्कूलों में इस तरह की कोई सुविधा नहीं दी जा रही. 
स्कूलों में एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो चुका है. इसके साथ ही प्रदेश सरकार का दावा है कि वह मॉडल संस्कृति स्कूलों में बच्चों को सीबीएसई की तर्ज पर इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई कराएगी. इसके लिए सरकार के गावों की पड़ताल एक प्रमुख हिंदी समाचार पत्र ने की. इसमें पाया गया की इन स्कूलों में हाईटेक सुविधा तो दूर दूर भी नहीं है साथ ही मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव मिला. 
पुराने स्कूलों का नाम बदलकर मॉडल संस्कृति स्कूल लिखा गया है. आलम यह है कि किसी स्कूल में स्टाफ की कमी है, कहीं कमरे पूरे नहीं है, बिल्डिंग की कमी है तो किसी स्कूल में पीने के पानी की उचित व्यवस्था तक नहीं है. किसी स्कूल में अबतक वाईफाई नहीं लगा तो कहीं जेनरेटर न होने से व बिजली न आने से कंप्यूटर लैब नहीं चल रही. स्कूलों में स्टाफ की ज्यादा कमी है जबकि मौजूदा स्टाफ को किसी न किसी सर्वे में उलझकर रखा जाता है. इन हालात के चलते बच्चे शिक्षा से कोसों दूर तो रहते ही हैं साथ ही मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पाती.