Yuva Haryana
3 साल पहले बने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को अब मिलेगा लाभ रास्ता हुआ साफ, 30 हजार से भी ज्यादा केस होंगे कम
 
हाल ही में हरियाणा के प्रशासनिक अधिकारियों वह कर्मचारियों को न्याय दिलाने के लिए गठित प्रशासनिक ट्रिब्यूनल खुद ही कानूनी पेर्चीदागियों में उलझ गया है और लगभग 3 साल पहले हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था लेकिन अधिसूचना जारी होने के बाद ही इस पर हाईकोर्ट ने स्टे कर दिया था। हिमाचल प्रदेश ओडिशा और आंध्र प्रदेश के प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को भी सरकार की तरफ से 3 सालों में खत्म कर दिया गया है जबकि हरियाणा के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने राज्य में गठित ट्रिब्यूनल का कोई फायदा ही नहीं हो रहा है। इसके अभाव से राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े करीब 350 केस पंजाब के और हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंचे गए हैं। जिन पर फैसला हो चुका है और कार्यवाही और सुनाई जारी है।
उसके बाद हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल की चेयर पर्सन के रूप में हाईकोर्ट की पूर्व रिटायर्ड न्यायाधीश जस्टिस स्नेह पराशर ने अब कमान संभाल ली है जिसके बाद ही उन्होंने अधिसूचना के स्टे होने की वजह से न तो किसी प्रशासनिक सदस्य की नियुक्ति हो पाई है और ना ही संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ पाई है। हेमंत कुमार का कहना है कि चेयर पर्सन की नियुक्ति पत्र सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। जिसके बाद हरियाणा सरकार और मुख्य सचिव की वेबसाइट पर या फिर केंद्र सरकार के विभाग की वेबसाइट पर कोई अपलोड 
किया गया है। इसी के साथ 24 जुलाई 2019 को दिए गए एक आरटीआई के जवाब में ट्रिब्यूनल की चेयरमैन का वेतनमान दो लाख 25 हजार रुपे बताया गया है। 
जिसके बाद उनकी नियुक्ति पर उनके पदभार ग्रहण करने के 5 वर्ष तक जब तक उनकी आयु 68 वर्ष की होने तक या अगले आदेश तक जो भी पहले हो मान्य होती है। वही 25 जुलाई 2019 को रिटायर्ड जस्टिस पराशर ने ट्रिब्यूनल की चेयरपर्सन के तौर पर कार्यभार को संभाला है। उनकी जन्म तिथि 21 जुलाई 1955 है और वह कार्यभार ग्रहण करते हुए उनकी आयु 64 वर्ष की थी, यानी कि वह 68 वर्ष तक की आयु तक चेयरपर्सन रह पाएंगे।