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नक़ल करने का निकला स्मार्ट तरीका , स्मार्टवाच से कर रहा था नकल, बोलकर पूछ रहा था प्रश्र, ऐसे पकड़ा गया
 

हरियाणा के कैथल में आरकेएसडी कॉलेज में हाईटेक तरीके से नकल करने का मामला पकड़ा गया है। गत 28 जुलाई को पकड़े गए मामले में एक परीक्षार्थी हाथ पर स्मार्ट वॉच बांधकर सवाल हल कर रहा था, जिसे केंद्र अधीक्षक ने पकड़ लिया। वह स्मार्ट वॉच से प्रश्र बोलकर पूछ रहा था, जो उसके मोबाइल से अटैच थी। उससे उसे उत्तर प्राप्त हो रहे थे। केंद्र अधीक्षक ने केस बनाने के लिए जरूरी सबूत जुटाकर विश्वविद्यालय भेज दिया है।



सुपरिंटेंडेंट अभिषेक गोयल ने बताया कि वे आरकेएसडी कॉलेज में स्नाकोत्तर की परीक्षाओं में बतौर परीक्षा केंद्र अधीक्षक ड्यूटी दे रहे हैं। गत 28 जुलाई को एमए अंग्रेजी विषय के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा थी, जिसमें एक युवक निरीक्षण के दौरान असहज स्थिति में दिखा। उसकी ओर नजर गई तो उसने अपना हाथ बेंच के नीचे कर लिया। जब उसके पास जाकर देखा तो उसके हाथ पर स्मार्ट वॉच बंधी थी, जिसकी स्क्रीन पर एक सवाल का जवाब आया था।

उसने अपनी स्मार्ट वॉच को मोबाइल से अटैच किया था। इस पर उसे पकड़ लिया गया। उसकी स्मार्ट वॉच की फोटो और अन्य सबूत जुटाकर नकल का केस बनाते हुए विश्वविद्यालय भेज दिया गया है। जांच पड़ताल के बाद आरकेएसडी सांध्यकालीन कॉलेज में एमए अंतिम वर्ष के छात्र को उसकी घड़ी सौंप दी गई। आगे की कार्रवाई विश्वविद्यालय स्तर पर होनी है।

केंद्र में 35 विद्यार्थियों को नकल करते पकड़ा
सुपरिंटेंडेंट ने बताया कि उन्हें आरकेएसडी कॉलेज में बनाए गए परीक्षा केंद्र का सुपरिंटेंडेंट बनाया गया है। वह अब तक 35 विद्यार्थियों को नकल करते पकड़ चुके हैं। इसमें विद्यार्थियों की ओर से नए-नए तरीकों से नकल की जा रही है। विद्यार्थी रोल नंबर के पीछे लिखकर, बोर्ड पर लिखकर और यहां तक कि अब डिजिटल हथकंडों को भी आजमा रहे हैं। गोयल ने बताया कि नकल करने वाले सभी विद्यार्थियों का केस बनाकर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में भेज दिया गया है। 

कमेटी में उपस्थिति करवानी होती है दर्ज
नकल के केस के सबंध में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने कोर्स के मुताबिक टीमों का गठन किया है। सुपरिंटेंडेंट ने बताया कि इसमें विद्यार्थी के पास एक महीने के अंदर कमेटी की तरफ से उपस्थित होने की सूचना आती है। इसके बाद कमेटी विद्यार्थी के परीक्षा देने को लेकर निर्णय लेती है। इसमें या तो विद्यार्थी को एक साल तक परीक्षा देने पर प्रतिबंध लगाया जाता है या दोबारा परीक्षा के लिए अनुमति दी जाती है।