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दिल्ली हरियाणा में शुरू हुआ मानसून का सीजन, झमाझम बारिश से लोग खुश, जानिए अगले 24 घंटे का मौसम
 
बरसात का मौसम भला किसे अच्छा नहीं लगता, भीषण गर्मी से बारिश ही राहत दिलाती है । सुहाना मौसम ठंडी ठंडी हवाएं जब शरीर को छू कर जाती है तो वो लम्हा बेहद खूबसूरत होता है। यहीं कारण है लोग मानसून का बेसब्री से इंतजार करते हैं और बादलों पर टक टकी लगाएं बैठते है।जब मेघ बरसते हैं तो लोगों जन्नत का एहसास होता है भले ही वो आम आदमी हो या किसान या फिर पशु पक्षी बरसात सभी को खुशहाली देती है ।
मानसून का मौसम आ चुका है ऐसे में दिल्ली-एनसीआर सहित महाराष्ट्र गुजरात में बारिश का तेज प्रभाव देखने को मिल रहा है। अन्य शहरों में बारिश देखी जा रही है पिछले 24 घंटे में मौसम में इतना बदलाव हुआ है कि तेज बारिश होने का अनुमान भी जताया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो अगले 24 घंटे में मौसम ऐसा ही रहेगा और तेज बारिश होने का अनुमान जताया जा रहा है। 
मौसम विभाग का कहना है कि देश के अन्य भागों में टर्फ रेखा उत्तरी क्षेत्र में स्थित होने के चलते अब उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली आदि क्षेत्रों में मानसून की अच्छी बारिश हो सकती है। अब आने वाले कुछ दिनों में हरियाणा में मानसून की मेहरबानी कायम रहने की उम्मीद है।
गुजरात, कोंकण और उत्तरी मध्य महाराष्ट्र में तेज बरसात का मौसम 14 जुलाई तक है। वहीं, मध्य व आसपास के प्रायद्वीपीय भारत में फिलहाल जारी रहने की संभावना है। विदर्भ, छत्तीसगढ़, गुजरात, कोंकण और गोवा और मध्य महाराष्ट्र सहित मध्य प्रदेश, ओडिशा, सौराष्ट्र, कच्छ, तेलंगाना, तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में भी यही स्थिति है तो दिल्ली, पूर्वी राजस्थान, असम, मराठवाड़ा और तटीय आंध्र प्रदेश में भी बारिश जारी है।
 मौसम विज्ञान की माने तो लद्दाख गिलगित बालटिस्तान मुजफ्फराबाद हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड पंजाब हरियाणा चंडीगढ़ दिल्ली में बारिश का दौर अगले 3 दिन तक जारी रहेगा जिससे लगातार झमाझम बारिश देखने को मिलेगी साथ ही गर्मी से भी राहत मिलेगी। पंजाब में भी तेरा 14 जुलाई को अच्छी बारिश के आसार दिखाई दे रहे हैं। 14 से 16 जुलाई तक पूर्वी मध्य प्रदेश, 13 जुलाई को विदर्भ और छत्तीसगढ़, केरल, मराठवाड़ा, तटीय आंध्र प्रदेश, तटीय व दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में यह स्थिति देखी जा सकती है।