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भाषा बन रही थी बाधा, हरियाणा पुलिस के रिटायर्ड अफसर ने की सहायता
 

अगर कोई किसी ऐसे राज्य में खो जाए, जहाँ ना कोई जानता ना हो ना ही वहां की भाषा का ज्ञान। और उम्र हो कम और याद हो आपके माता पिता और गाँव का नाम। ऐसी ही स्थिति में फंस गयी थी उत्तर प्रदेश की रहने वाली 14 वर्षीय आरिफा (काल्पनिक नाम)।  स्टेट क्राइम ब्रांच के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया की एल्लेपी, केरल के चाइल्ड केयर अधिकारीयों को नाबालिग से काउंसलिंग करने में और परिवार को ढूंढने में समस्या आ रही थी।  हिंदी भाषी लड़की होने के कारण चाइल्ड वेलफेयर इंस्पेक्टर कोझिकोड द्वारा स्टेट क्राइम ब्रांच हरियाणा से सम्पर्क किया गया और बताया की हमारे पास एक हिंदी बोलने वाली लड़की है और हमें भाषा ना समझ आने के कारण उसके परिवार को ढूंढने में समस्या आ रही है। मामले की नजाकत को भांपते हुए एससीबी की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, पंचकूला ने लड़की को उसके परिवार से मिलने का बीड़ा उठाया। जैसा की विदित है की एएचटीयु सिर्फ हरियाणा ही नहीं बाकी राज्यों में भी लापता को उनके परिवार से मिलवाने का काम कर रही है। जांच से पता चला की नाबालिग दिव्यांग है और गलती से ट्रैन से पहले आंध्र प्रदेश पहुंची और वहां से केरल के एल्लेपी में पहुँच गयी। वहां भाषा से अनजान होने के कारण नाबालिग को केरल की पुलिस द्वारा रेस्क्यू कर चाइल्ड केयर सेंटर भेजा गया। एएचटीयु पंचकूला में कार्यरत एएसआई राजेश कुमार ने उपरोक्त केस पर काम करना शुरू किया और वीडियो कॉल द्वारा नाबालिग की काउंसलिंग की। काउंसलिंग के दौरान पता चला की भाषा से अनजान होने के कारण वह एल्लेपी में पदाधिकारियों को अपनी बात नहीं समझा पा रही है। 

काउन्सलिंग में मिला उत्तर प्रदेश का क्लू, लोकल थानों में बात कर ढूंढा परिवार

         काउन्सलिंग के दौरान नाबालिग द्वारा एएसआई राजेश कुमार से बातचीत की और बताया की मुज्जफरनगर में किसी बागवाली मस्जिद के पास रहती है। यह पता चलने पर एएसआई राजेश कुमार द्वारा बागवाली मस्जिद में थानों में सम्पर्क किया गया।  विभिन्न थानों में सम्पर्क करने पर बागवाली थाना में दर्ज मुकदमा से परिवार के फोन नंबर प्राप्त किया।  संबंधित कोतवाली ने जानकारी प्राप्त होने के बाद आगे की कार्यवाही शुरू की नाबालिग के परिवार से सम्पर्क साध बेटी मिलने की खबर परिवार तक पहुंचाई।

भाषा बनी थी बाधक, हरियाणा पुलिस के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक ने की मदद

         एससीबी प्रवक्ता ने बताया की अनुसन्धान के दौरान अनुसंधान अधिकारी को सबसे अधिक समस्या भाषा की आयी। केरल में मलयालम भाषा बोलने के कारण वहां अधिकारीयों से बातचीत में समस्या आ रही थी और वार्तालाप स्थापित नहीं हो पा रहा था। इसी समस्या के समाधान के लिए अनुसंधान अधिकारी द्वारा हरियाणा पुलिस के एक रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक से सम्पर्क कर सहायता मांगी। नाबालिग को अपने परिवार से मिलवाने की कवायद में रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक द्वारा अपने एक सहयोगी का नंबर ए एस आई राजेश कुमार को दिया जिसे हिंदी व मलयालम दोनों भाषाओँ का ज्ञान था। मध्यस्थ की सहायता से ए एस आई राजेश कुमार ने नाबालिग व वहां के अधिकारीयों से बातचीत की और लड़की की काउंसलिंग करने में सफलता हासिल की। 

लिया टेक्नोलॉजी का सहारा, वीडियो कॉल से करवाई पहचान

आगे जानकारी देते हुए बताया की नाबालिग की पहले माता पिता से वीडियो कॉल पर बात करवाई गयी  जहाँ पर माता पिता ने अपनी बेटी को पहचान लिया। अनुसंधान के दौरान पता चला की पिता द्वारा अपनी बेटी को ढूंढने के लिए काफी सारा पैसा भी खर्च किया गया।  एक तरह से माता पिता द्वारा बेटी को दोबारा देखने की आस खो चुके थे लेकिन स्टेट क्राइम ब्रांच हरियाणा की टीम की मेहनत ने माता पिता से मिलवा दिया। बच्ची 3 महीने से लापता थी।

कहीं भी मिलता है कोई लापता, उसे इग्नोर ना करें: ओ पी सिंह, आईपीएस, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक

        यदि कोई महिला, बच्चा या पुरुष आपको कहीं  लावारिस दिखे तो उसे इग्नोर ना करें।  उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें।  आपकी थोड़ी सी मेहनत किसी को अपने परिवार से मिलवा सकती है। ऐसे समय में गुम हुआ इंसान डरा हुआ व अकेला होता है। ऐसी स्थिति में संबंधित थाने या 112 सुचना दें। इस वक्त प्रदेश में 22 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट कार्य कर रही है जो दिन रात गुमशुदा व लापता को उनके परिवार से मिलवाने के प्रयासरत है। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का मुख्य उद्देश्य बंधुआ मजदूर, देह व्यापार और बाल श्रम पर अंकुश लगाना व लापता को अपनों से मिलवाना है।