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हरियाणा के सरकारी स्कूल का हुआ पर्दाफाश, कर रहे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
 

प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए ₹500 फीस तय करने के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर छिड़ी बहस में तीन ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं। जो शिक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है। जींद जिले के सरकारी स्कूलों की यह तस्वीरें कक्षा की जमीनी हकीकत बयां करने के लिए काफी है। जींद के गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा के जिन हाथों में किताबें होनी चाहिए थी, उन हाथों में झाड़ू है।

वहीं दूसरी और डिप्टी सीएम के विधानसभा क्षेत्र में एक स्कूल में बरसात का पानी भर जाने के बाद बच्चों के बाहर निकलने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं तीसरी तस्वीर में छोटे-छोटे बच्चों को पानी से भरे हुए भारी कैंपर उठाते हुए देखा जा रहा है। बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का नारा देने वाले हरियाणा में आज है नारा कई जगह पूरी तरह से विफल नजर आ रहा है। लोग अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए स्कूल तो भेजते हैं, लेकिन वह उनकी बेटियों के हाथ में झाड़ू उठाकर क्लास रूम की सफाई करनी पड़ती है। जिनके हाथों में किताब होनी चाहिए उनके हाथों में झाड़ू थमा दिया। 

दूसरी और तीसरी हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दर्शन चौटाला के विधानसभा क्षेत्र उचाना में एक सरकारी स्कूल में भी हालात बेहद खराब है। बारिश के चलते बुढ़ायन गावं के राजकीय मिडल स्कुल में 2 फिट बारिश का भर गया। स्कूल में पानी भरने से बच्चों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, एक ट्रैक्टर ट्रॉली का सहारा लेकर छोटे-छोटे बच्चे स्कूल से बाहर आ रहे हैं। 
वहीं जिले के एक अन्य सरकारी स्कूलों में छोटे-छोटे बच्चों से पानी की ढुआई कराई जा रही है। बच्चों के हाथ में भारी भारी कैंपर उठाने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। स्कूल में पढ़ने आने वाले बच्चों के हाथों में 15 -15 किलो के पानी के कैंपर थमा रखे हैं ।ऐसे में बच्चे शिक्षा ग्रहण कैसे करेंगे और कैसे आगे बढ़ेंगे। इन 3 मामलों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स ने कहा है कि अब यह मामला प्रशासन के संज्ञान में आ गया है। स्कूल में बच्चों से कैंपर उठवाने और झाड़ू लगवाने के मामलों में संबंधित स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।