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हरियाणा सरकार का भ्रष्टाचारियों पर वार, अब भ्रष्ट अफसरों पर रखी जाएगी पैनी नजर, रिश्वत लेने पर होगी सीधा गिरफ्तारी
 

हरियाणा अब भ्रष्टाचार में सबसे नंबर वन पर चल रहा है और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए हरियाणा में एसीपी के नाम पर चल रहे भ्रष्टाचार को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने अहम कदम उठाए हैं।‌ जिसके बाद भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार ने एसीपी को मानव संसाधन विकास प्रणाली के साथ मिलकर जोड़ दिया है। जिसके बाद अब 1 अगस्त से लेकर सभी विभागों को अपने-अपने एसपी के केस मैनुअली के बकाए ऑनलाइन करने होंगे। अगर कोई भी अधिकारियों कर्मचारी इससे फॉलो नहीं करता तो उसका वेतन वही रोक दिया जाएगा।

इस ऑनलाइन प्रक्रिया का सबसे अहम महत्व यह है कि इससे सीधा 2.89 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों को फायदा होगा। इसके चलते वित्त विभाग ने सभी उपायुक्तों, विभागघ्यक्षों, और डिवीजन अफसरों को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। अगर पहले की बात की जाए तो विभागों में एसपी की फाइल मैनुअली चलती आई है, जिसकी वजह से हर विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं और भ्रष्टाचार की वजह से ही कितने कर्मचारियों की फाइलें कभी खुली ही नहीं। मामलों की बात करी जाए तो अभी भी हजार मामले ऐसे हैं जो लंबित पड़े हुए हैं उनकी बारी आज तक आएगी नहीं और वह एसीपी के नाम पर रिश्वत खाते आए हैं और अब रिश्वत खाने जैसी शिकायतें भी सरकार के पास आ रही है।


इतने भ्रष्टाचार के आरोपों के लगने के बाद हरियाणा सरकार ने इस मामले को अब जाकर गंभीरता से लिया है और हरियाणा सरकार ने ही 26 जून को बैठक बुलाई थी और बैठक में यह देखा गया कि सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया से केवल शिक्षा विभाग ही काम कर रहा है और अभी बाकी विभाग सभी केस निपटाने के लिए थोड़ा वक्त मांगा है।

जिसके बाद 1 अगस्त से सभी एचआरएमएस के माध्यम से करने होंगे। सबसे अहम बात यह भी है कि 2018 में भी सरकार ने सारी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने को कहा था लेकिन तब किसी भी विभाग में सरकार की कही हुई बात को गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन अब सरकार की ओर से खजाना विभाग के सुनील और एन आई सी के यशपाल को स्टेट नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जो सभी प्रक्रिया का ध्यान रखेंगे।

जो कर्मचारी 8,16 या 24 साल की अपनी सर्विस पूरी करते हैं उन्हें ही एसीपी मिलती है। जिसके बाद उस कर्मचारी को पदोन्नति के अनुरूप आर्थिक लाभ मिलना शुरू होता है, लेकिन यह रोज में होने वाली विभागीय प्रक्रिया है लेकिन इन विभागों में किसी भी कर्मचारियों को समय पर कभी एसीपी मिली ही नहीं जिसके लिए वह हमेशा मुख्यालय के चक्कर लगाते हैं। सबसे अहम बात तो यह है कि यह सारा कार्य मुख्यालय से ही जुड़ा हुआ है और लोग वहां के रोजाना चक्कर लगा लगा कर अपना काम पूरा कराने की कोशिश करते हैं।