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नगर निकाय एक चेयरमैन को अपने पाले में करने की फिराक में सरकार, उठापटक शुरू
 
हरियाणा में शहरी निकाय चुनाव में निर्दलीय जीते 19 चेयरमैन को सरकार के पाले में लाने के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गया है. भाजपा से बागी होकर सात उम्मीदवार चेयरमैन का चुनाव लड़े और जीत भी गए. इनके संपर्क में संबंधित क्षेत्र के विधायक और मंत्री बुधवार से ही हैं. सात में से कुछ चेयरमैन तो भाजपा विधायकों के करीबी भी हैं.
बरवाला से रमेश बैटरीवाला समेत तीन चेयरमैन की गुरुवार को सरकार के समर्थन में आने की बात हुई है. चार अन्य निर्दलीय चेयरमैन भी एक-दो दिन में सरकार के साथ आ जाएंगे. नारनौल से निर्दलीय जीती कमलेश सैणी ने जजपा में अपनी आस्था जता दी है. इससे जेजेपी के खाते में एक और निकाय चेयरमैन आ गया. अब उनके चेयरमैन की संख्या चार हो गई है.
नारनौल नगरपरिषद चेयरमैन कमलेश गुरुवार को चंडीगढ़ में उपमुख्यमंत्री से मिलीं. उन्होंने पार्टी के साथ रहने का विश्वास दिलाया. वह जेजेपी की राष्ट्रीय महासचिव रही हैं. नारनौल से जेजेपी की टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा है।. जजपा के साथ निसिंग, तरावड़ी नगरपालिका और हांसी नगर परिषद के चेयरमैन भी आ सकते हैं. सूत्रों के अनुसार दोनों जजपा के ही कार्यकर्ता थे, लेकिन टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा. 
ये काफी समय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. भाजपा के अकेले निकाय चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद जजपा से इनका टिकट भी तय था, लेकिन कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद भाजपा-जजपा का निकाय चुनाव में गठबंधन हो गया. ऐसे में टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनावी दंगल में कूदे और जीत भी गए. तरावड़ी नगरपालिका में निर्दलीय चेयरमैन जीते विरेंद्र बंसल भी जजपा से जुड़े रहे हैं. भाजपा से गठबंधन होने के पहले जजपा ने बंसल को प्रत्याशी घोषित कर दिया था. गठबंधन के बाद तरावड़ी में भाजपा ने अपना उम्मीदवार उतारा, लेकिन विरेंद्र आजाद लड़ गए. उन्हें 7059 व भाजपा उम्मीदवार को 6521 वोट मिले. 
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण आत्रेय ने कहा कि निकाय चुनाव में मनोहर सरकार और संगठन के कामकाज पर मुहर लगी है. सरकार के समान विकास का ही नतीजा है कि भाजपा ने कांग्रेस के गढ़ों को धवस्त कर दिया.