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इन 7 ऐप को भूलकर भी ना करें अपने फोन में डाउनलोड, वरना मिनटों में खाली हो जाएगा आपका अकाउंट, ठगों से हो जाएं सावधान!
 
अब हमारा देश दिन प्रतिदिन डिजिटल होता जा रहा है और अब हर कोई व्यक्ति डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दे रहा है और जैसे-जैसे हम डिजिटल होते जा रहे हैं वैसे वैसे ही ठगी के नए-नए तरीके भी हमारे सामने रोजाना आ रहे हैं। इन सब दोषियों को सजा दिलवाना अब पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। अब हर किसी व्यक्ति को खुद ही ठगों से बचने के लिए जागरूक होना जरूरी है और अगर आप सभी भी स्मार्ट फोन चलाते हैं तो आपको कुछ एप्लीकेशन के बारे में जानना बहुत जरूरी है जिससे आप ठग से बच सकते हैं। सबसे पहली एप्लीकेशन का नाम है एनीडेस्क: अगर कोई भी ठग आपको उसके विश्वास में लेकर आपके मोबाइल फोन में यह एप्लीकेशन डाउनलोड करवाता है तो इसका मतलब साफ है कि वह आप अपने मोबाइल का ऑपरेटिंग सिस्टम उसको दे दिया है और अब वह फोन का पर्सनल डाटा लेकर अन्य एप्लीकेशन का भी इस्तेमाल कर सकता है और देखा गया है कि इस एप्लीकेशन का इस्तेमाल कारपोरेट कंपनियों में होता है। जहां पर दूर बैठे इंजीनियर ऑफिस में रखे कंप्यूटर को आसानी से ठीक कर सकता है, लेकिन आजकल इसका इस्तेमाल ठगी में ज्यादा होने लगा है।
दूसरी एप्लीकेशन का नाम है क्लिक स्पॉट; इस एप्लीकेशन में भी रिमोट एक्सेस है और यह यह एकदम एनीडेक्स की तरह काम करता है और इसको हम इंटरनेट के माध्यम से चला सकते हैं यह फाइल ट्रांसफर,वेब कॉन्फ्रेंसिंग आदि के लिए काम आता है।
टीम विवर: यह भी ऊपर वाली दो एप्लीकेशंस की तरह ही काम करता है। और इन एप्लीकेशंस पर काम करने के लिए सबसे पहले आपको आईडी और पासवर्ड की जरूरत पड़ती है। तभी आप इन एप्लीकेशंस में काम कर सकते हैं।
इसी के चलते हैं रोहतक साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर कुलदीप सिंह का कहना है कि अभी फिलहाल ऐसे मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं और थक बैंक या किसी अन्य विभाग के अधिकारी बनकर कॉल करते हैं वह कॉल करने के बाद आपको इस एप्लीकेशन को डाउनलोड करने को कहते हैं और डाउनलोड होते ही वह आईडी और पासवर्ड मांगेंगे जो इन एप्लीकेशन को डाउनलोड करते ही जनरेट होगा अगर आप ने उन्हें अपना आईडी और पासवर्ड शेयर करा तो आपका मोबाइल फोन ठग हो जाता है। उसके बाद साइबर ठगों से बचने के लिए जरूरी है कि आपको पता हो कि किन चीजों को याद रखना आपके लिए जरूरी है और कभी भी अपना ओटीपी किसी के साथ शेयर ना करें और हमेशा याद रखें कि अगर हमारे खाते से दूसरे के खाते में रुपए भेजने के लिए हमें ओटीपी की जरूरत पड़ती है, लेकिन अगर अन्य व्यक्ति आपके पास रुपए भेजता है तो उसके लिए ओटीपी बताने की जरूरत नहीं होती और हग अक्सर इसी चीज का फायदा उठाकर लोगों को शिकार बनाते हैं।
दिन प्रतिदिन साइबर ठगी के केस बढ़ते ही जा रहे हैं और इन पर शिकंजा कसने के लिए जिले में साइबर थाने भी खोले जा रहे हैं इसमें पूरी टीम फाइबर की अच्छी जानकारी और समय-समय पर ट्रेनिंग भी करवाई जा रही है और साइबर ठगी को लेकर पुलिस भी काफी एलॉट है और लोगों को समझा रही है कि कैसे साइबर ठगों का शिकार बनने से कैसे बचा जा सकता है।