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कांग्रेस के बागी कुलदीप बिश्नोई कि भाजपा से बढ़ी नजदीकियां, हरियाणा राज्यसभा चुनाव में की थी क्रॉस वोटिंग
 
राष्ट्रपति चुनाव के ठीक बाद भाजपा में शामिल होने की तैयारी कर रहे आदमपुर के विधायक कुलदीप विश्नोई को रोकने के लिए कांग्रेस की मान मनौव्वल करने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कुलदीप के भाजपा नेताओं के संपर्क में होने के बावजूद उन्हें मिलने के लिए नहीं बुलाया। कांग्रेस का मानना है कि कुलदीप बिश्नोई अक्सर दबाव की राजनीति करते हैं, कांग्रेस हाईकमान ने जब पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके कैप्टन अरविंदर सिंह का दवाब नहीं माना तो कुलदीप विश्नोई सिर्फ दो बार के सांसद और चार बार के विधायक ही हैं। जिन्हें कांग्रेस अपनी पार्टी में रोकने के लिए बिल्कुल भी चिंतित नहीं दिखाई दे रही भाजपा में भी एक बड़ा तबका कुलदीप की एंट्री का विरोध कर रहा है। 
हिसार और भिवानी के सांसद रह चुके कुलदीप बिश्नोई को उनके समर्थन कांग्रेस के गैर जाट नेतृत्व के रूप में पेश करते हैं राज्यसभा चुनाव में कुलदीप ने क्रॉस वोटिंग कर कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन को हराने में अहम भूमिका निभाई। माकन की हार उन परिस्थितियों में हुई जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समर्थक सभी 29 विधायकों में पूरी एकजुटता के साथ उन्हें वोट दिया है। एक कांग्रेस विधायक का वोट रद्द हुआ है।
कुलदीप के क्रॉस वोटिंग के फैसले से हाईकमान बेहद नाराज है और उन्हें स्वयं ही पार्टी से किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं करना चाह रहा। कुलदीप बिश्नोई की पीड़ा है कि राहुल गांधी ने वादा करने के बावजूद उन्हें कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया इस बातों का जवाब मांगने के लिए कुलदीप ने राहुल से मुलाकात की कई बार कोशिश भी की लेकिन अपनी व्यवस्थाओं के चलते राहुल गांधी उनसे मिल ही नहीं पाए। अब भाजपा कुलदीप को अपनी पार्टी में शामिल कराकर राज्यसभा चुनाव में कार्तिकेय शर्मा को जिताने का इनाम देने के प्रयासों में है। भाजपा में एक बड़ा तबका कुलदीप बिश्नोई की एंट्री का विरोध कर रहा है उनके विरोध की कई ठोस वजह भाजपा हाईकमान की गिनवाई जा रही है।  
कुलदीप के बारे में भाजपा हाईकमान को कहा जा रहा है कि वह स्थाई नेता नहीं हैं और हमेशा अपरिपक्व राजनीति करते आए हैं। कई मौके ऐसे आए, जब भाजपा, बसपा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की हरियाणा जनचेतना पार्टी के साथ कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठबंधन रहा है। और गठबंधन के भरोसे पर कुलदीप कभी खरे नहीं उतरे। गठबंधन में जितने भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़े गये, उनमें अधिकतर में कुलदीप बिश्नोई और उनकी पार्टी का राजनीतिक प्रदर्शन बिल्कुल भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा, भाजपा स्वयं ही कुलदीप की पार्टी से एक बार गठबंधन कर तोड़ चुकी है। ऐसे में कुलदीप को गैर जाट नेतृत्व के रूप में भाजपा में शामिल करना फायदे का कम और नुकसान का सौदा ज्यादा है, क्योंकि उनका धरातल पर जरा भी जनाधार नहीं है।
कुलदीप बिश्नोई के समर्थक भाजपा और कांग्रेस नेताओं के इस दलील से सहमत नहीं हैं। और उन्हें गैर जाटों का बड़ा नेता मानते हैं। यह भी दलील दी जा रही है कि कुलदीप के कांग्रेस छोड़ने के बाद पार्टी के पास सिर्फ जाट नेता बचे रह जाएंगे जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला पूर्व केंद्र मंत्री कुमारी शैलजा कांग्रेस विधायक दल की पूर्व नेता किरण चौधरी और पूर्व सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय यादव ऐसे बड़े नेता कांग्रेस के पास है। जिनका ना सिर्फ जाटव बल्कि अपनी अपनी बिरादरी के अलावा सर्वसमाज यानी गैर जाटों में भी पूरा प्रभाव है। 
भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा के समर्थक कांग्रेस के 29 विधायकों में चौधरी उदयभान, गीता भुक्कल, राव दान सिंह, कुलदीप शर्मा, फूलचंद मुलाना, शकुंतला खटक, बीबी बत्रा, आफताब अहमद, चिरंजीव राव, जितेंद्र भारद्वाज, रामकिशन गुर्जर, सुरेश गुप्ता मतलौडा, नीरज शर्मा और वरुण चौधरी सरीखे ऐसे कई गैर जाट चेहरे हैं, जो किसी भी चुनाव की दिशा बदल देने का माद्दा रखते हैं। ऐसे में कांग्रेस को लगता है कि कुलदीप भाजपा में जाना चाहते हैं तो जाएं, लेकिन पार्टी किसी दबाव में आकर कुलदीप को मनाने का काम किसी सूरत में नहीं करने वाली है। हरियाणा कांग्रेस प्रभारी विवेक बंसल का कहना है कि कांग्रेस पार्टी तमाम कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है और यह बात सही है कि कुलदीप ने क्रॉस वोटिंग कर अनुशासनहीनता की है पार्टी ने इसका संज्ञान लिया और कुलदीप को सभी पदों से मुक्त कर दिया गया है कुलदीप की भाजपा नेताओं से मुलाकात हमारी जानकारी में है। मैं पार्टी आलाकमान से इस मुद्दे पर बात करूंगा। अगर कुलदीप ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला कर लिया है तो वह जाने।