Yuva Haryana
आखिर क्यों मूसेवाला के‌ एसवाईएल गाने पर युवाओं ने दिखाया रोष ,महज 16 घंटों में हुआ 8 मिलियन क्रॉस
 

सिद्धू मूसेवाला का सतलुज यूमना लिंक , एसएलवाई  गाना ट्रेंड कर रहा है। महज 16 घंटों में गाने को उनके यूट्यूब चैनल पर 140 लाख लोग देख चुके हैं। सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद यह पहला गाना रिलीज हुआ है। पंजाब में काना बेहद पसंद किया जा रहा है , मगर गाने के बोल हरियाणा वासियों को पसंद नहीं आ रहे सोशल मीडिया पर युवा वर्ग इस गाने को लेकर अपनी रोज भारी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सिद्धू मूसेवाला के गाने की शुरुआत ही हरियाणा में आम आदमी पार्टी के नेता रहे नवीन जयहिंद की बाइट से है। जिसमें नवीन जयहिंद कह रहे हैं कि पंजाब में हमारी सरकार आ गई है 2024 में हरियाणा में भी आएगी और 2025 में हरियाणा के हर खेते के हर डोले में पानी पहुंचेगा।  इस बात को उठाते हुए सिद्धू मूसेवाला ने तंग करते हुए कहा कि हरियाणा एसएलवाई  का पानी मांग रहा है। मगर हम एक बूंद भी नहीं देने वाले।

सिद्धू मूसेवाला के गाने में ग्राफिक्स का इस्तेमाल करते हुए एसवाईएल के पानी के स्ट्रक्चर को दिखाया गया है। सिद्धू मूसेवाला ने पानी नहीं बल्कि चंडीगढ़ और हरियाणा को पंजाब में दिए जाने को लेकर भी तंज कसा है। गाने के विवादित बोल पंजाब में पसंद किए जा रहे हैं । मगर हरियाणा में इन्हें लेकर चर्चा चल रही है। क्योंकि एसवाईएल का मुद्दा हरियाणा में सुर्खियों में रहता है और इसके पानी की मांग लगातार की जाती है। वही चंडीगढ़ भी हरियाणा पंजाब की  राजधानी है।‌ इस पर भी विवाद बना हुआ है।‌ ऐसे में इस तरह की बातों को गाने में दोहराने को लेकर हरियाणा के युवाओं में रोष नजर आ रहा है। गाने में सिद्धू  ने किसान आंदोलन में लाल किले पर निशान साहिब के झंडे को फहराने को भी सही बताया है और पंजाबी गायक बब्बू मान पर दोगला होने का तंज कसा है , क्योंकि 26 जनवरी को दिन यह घटना होने पर बब्बू मान ने कहा था कि इतना दुख तो मुझे मां बाप के मरने पर नहीं हुआ जितना आज हुआ। सिद्धू के गाने में इस बाइक को दिखाया भी गया है सिद्दू मूसे वाला ने गाने में बलविंदर की भी तारीफ की, जिसमें एसवाईएल प्रोजेक्ट पर काम कर रहे दो अफसरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।


वही एसवाईएल गाने में पहले जम्मू और अब मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के उस बयान को भी लिया गया है।‌जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को कृषि कानून वापस लेने को लेकर हिदायत दी थी ।‌सत्यपाल मलिक ने कहा था कि यह कौम तो 600 साल भी बात भूलती नहीं है।‌ इंदिरा गांधी भी कहती थी कि यह मुझे मार देंगे और उन्होंने उनको मार दिया वही जनरल डायर को लंदन में जाकर मारा । इसलिए पीएम मोदी से मैं कह रहा हूं कि इनके सब्र का इम्तिहान मत ले। 1955 में पंजाब और हरियाणा एक ही थे। और रावी और ब्‍यास नदी का पानी पंजाब, राजस्‍थान और जम्‍मू कश्‍मीर में बांटा गया था। रावी ब्‍यास नदी में कुल 15.85 एमएएफ यानि मिलिएन एकड़ फीट पानी स्‍तर नोट किया गया था। इसमें से राजस्‍थान को 8, पंजाब को 7.20 और जम्‍मू कश्‍मीर को 0.65 पानी दिया गया था। मगर 1966 में हरियाणा अलग राज्य बन गया और पानी की मांग की थी 1970 में केंद्र सरकार ने पंजाब को मिले पानी 7.20 में से 3.5 एमएएफ पानी देने की बात कही। 1982 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पटियाला में सतलुज को यमुना में लिंक करके हरियाणा को पानी देने का प्रोजेक्‍ट बनाया।

इसमें समझौता हुआ कि कुल 214 किलोमीटर लंबी नहर में 122 किलोमीटर एरिया पंजाब में होगा और 92 किलोमीटर हरियाणा में बनाई जाएंगी।  इस दौरान पंजाब हरियाणा और पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी। पंजाब के सीएम दरबरा सिंह थे हरियाणा के सीएम चौधरी भजनलाल थे राजस्थान के सीएम शिवचरण माथुर थे। इस दौरान एसवाईएल में पानी दो एमएएफ और बढ़ गया था, इसमें फिर से नए सिरे से पानी के बंटवारा करने का प्‍लान बनाया गया। इसमें दिल्ली को भी शामिल किया गया। केंद्र में भी कांग्रेस की ही सरकार थी। मगर पंजाब में विपक्ष में बैठे अकाली दल में इस योजना का विरोध किया।  1990 में हरियाणा ने केंद्र सरकार से फिर गुहार लगाई । 1996 में हरियाणा सुप्रीम कोर्ट में गया। 2004 में कोर्ट का सेंट्रल एजेंसी बनाई जाए। 2016 में फिर एक स्टेटमेंट आई जिसमें कहा गया कि सेंट्रल एजेंसी बनाने की बात केवल एक राय थी।  ऐसे में यह विवाद नहीं सुलझा नहर बनाने की जगह पर लोगों ने आवास बना लिए। 2017 में कोर्ट ने हरियाणा पंजाब को शांति से मामला निपटाने की हिदायत दी । अभी भी एसवाईएल पर सुनवाई चल रही है, मगर विवाद नहीं सुलझा है।  हरियाणा में भी जब भी चुनाव होते हैं तो नेता एसवाईएल नहर का पानी लाने की बात करते हैं।