हरियाणा में महाग्रामों में स्ट्रीट लाइट लगाने की जिम्मेदारी जिला परिषदों को सौंपी,गांव भी शहरों की भांति बनेगे स्वच्छ एवं सुन्दर

Sahab Ram
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Yuva Haryana : हरियाणा सरकार पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही के साथ स्वायत्तता के सिद्धांत के समावेश के लिए समर्पित है। पंचायती राज संस्थाओं को एक परिभाषित फॉर्मूले के आधार पर राज्य के स्वयं कर राजस्व (एस.ओ.टी.आर.) के हिसाब से प्रति व्यक्ति के आधार पर सरकार द्वारा धनराशि सीधे भेजी जा रही है।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं द्वारा किए जाने वाले कार्यों का आवंटन स्पष्ट और विशिष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और पंचायती राज संस्थाएं उन्हें सौंपे गए कार्यों की प्रकृति व प्राथमिकता स्वयं निर्धारित कर सकती हैं। अब इन कार्यो को समय पर पूरा कर लोगों को लाभ दिया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि जिला परिषदों में 699 पद सृजित करके इंजीनियरिंग विंग की स्थापना की गई है ताकि वे ग्रामीण बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभाल सकें। इसके अलावा 710 ग्राम पंचायतों और सभी महाग्रामों में स्ट्रीट लाइट लगाने की जिम्मेदारी जिला परिषदों को सौंपी गई है। जिला परिषदों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-केंद्रों के रखरखाव के अलावा हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा निर्मित ग्रामीण सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
प्रवक्ता ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की चौपालों की मरम्मत के लिए धन सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं ताकि चौपालों के रख-रखाव में इस राशि का सही प्रयोग हो सके। इन चौपालों की मरम्मत की मांग ग्राम पंचायतों द्वारा ग्राम दर्शन पोर्टल पर अपलोड की जा सकती है या जन संवाद कार्यक्रमों में भी उठाई जा सकती है।
सरकार ने पिछले वर्ष ग्रामीण प्रशासन में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देते हुए, उनके मानदेय में वृद्धि की है और मानदेय को निर्वाचित प्रतिनिधियों के बैंक खाते में सीधे जमा करवाने का एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
प्रवक्ता ने बताया कि इस प्रकार पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण विकास को बढावा देने के लिए सरकार ने कारगर कदम उठाएं है। यदि ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों को अधिक अधिकार मिलेंगे तो वे और भी बेहतर ढंग से कार्य कर लोगों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाकर गांवों में ही उन्हें कार्य उपलब्ध करवा सकेंगी। इससे ग्रामीणों का रुझान शहरों की ओर नहीं बढ़ेगा और गांव भी शहरों की भांति स्वच्छ एवं सुंदर बन सकेंगे।
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