मुख्यमंत्री ने बतौर वित्त मंत्री लगातार सरकार का पांचवां टैक्स फ्री बजट किया प्रस्तुत

Sahab Ram
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हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने बतौर वित्त मंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार का लगातार पांचवां बजट प्रस्तुत किया। उन्होंने वर्ष 2024-25 के लिए 1,89,876.61 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया, जोकि वर्ष 2023-24 के 1,70,490.84 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमानों से 11.37 प्रतिशत अधिक है। बजट अनुमान 2024-25 में कोई नया कर नहीं लगाया गया है। यह जनहित का बजट है, इसमें हर वर्ग का ख्याल रखा गया है।

        बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि 1,16,638.90 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति का अनुमान है, जिसमें 84,551.10 करोड़ रुपये का कर राजस्व और 9,243.46 करोड़ रुपये गैर-कर राजस्व शामिल है। कर राजस्व प्राप्ति में जी.एस.टी, वैट, आबकारी और स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क राजस्व प्राप्ति के प्रमुख स्रोत हैं। केंद्रीय कर का हिस्सा 13,332.23 करोड़ रुपये है और केन्द्रीय अनुदान सहायता 9,512.11 करोड़ रुपये है। इसके अलावा मैने 72,722.01 करोड़ रुपये की पूंजीगत प्राप्ति का अनुमान लगाया है।

        श्री मनोहर लाल ने कहा कि राजस्व परिव्यय के रूप में 1,34,456.36 करोड़ रुपये और पूंजीगत परिव्यय के रूप में 55,420.25 करोड़ रुपये शामिल हैं, जो कुल बजट का क्रमशः 70.81 प्रतिशत और 29.19 प्रतिशत है। इसके अलावा, वर्ष 2024-25 में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भी पूंजीगत बुनियादी ढांचे के निर्माण पर 8,119.24 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने की योजना है। इसलिए, कुल मिलाकर, इस वित्त वर्ष के लिए परिव्यय 63,539.49 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

वर्ष 2023-24 में हरियाणा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 8.0 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानितजबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान

        वित्त मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि वर्ष 2014-15 से वर्ष 2023-24 की अवधि में सकल राज्य घरेलू उत्पाद की वार्षिक चक्रवृद्धि दर स्थिर मूल्यों (2011-12 के मूल्यों) पर 6.1 प्रतिशत रही है, जो वर्ष 2014-15 के 3,70,535 करोड़ रुपये से वर्ष 2023-24 में बढ़कर 6,34,027 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसी अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर स्थिर मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद में 5.6 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर दर्ज की गई है। राष्ट्रीय विकास की तुलना में हरियाणा की तीव्र वृद्धि का अर्थ है कि अखिल भारतीय सकल घरेलू उत्पाद में हरियाणा की जी.एस.डी.पी. की हिस्सेदारी वर्ष 2014-15 में 3.5 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 3.7 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो हरियाणा की जनसंख्या और भारत की जनसंख्या में अनुपात से कहीं अधिक है। हरियाणा के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वर्ष 2023-24 में 8.0 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में  7.3 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।

        वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान कीमतों पर राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2014-15 में 86,647 रुपये से वर्ष 2023-24 में बढ़कर 1,85,854 रुपये अनुमानित है। यह वृद्धि 114 प्रतिशत है, जबकि, हरियाणा में यह वर्ष 2014-15 में 1,47,382 रुपये से वर्ष 2023-24 में बढ़कर 3,25,759 रुपये होने का अनुमान है, जो कि 121 प्रतिशत की वृद्धि है।

        उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 में वर्तमान मूल्यों पर कुल सकल राज्य मूल्य वर्धित में द्वितीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी 29.3 प्रतिशत अनुमानित है। वर्ष 2023-24 में सकल राज्य मूल्य वर्धित में तृतीयक क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 52.6 प्रतिशत तथा प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 18.1 प्रतिशत अनुमानित है।  वर्ष 2023-24 में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में क्रमशः 8.6 प्रतिशत, 6.3 प्रतिशत और 13.8 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।

राजकोषीय मानक

        वित्त मंत्री ने कहा कि हरियाणा हमेशा राजकोषीय मानकों को विवेकपूर्ण मानकों के अंदर बनाए रखने में सफल रहा है। संशोधित अनुमान 2023-24 में राजकोषीय घाटे को जी.एस.डी.पी. के 3 प्रतिशत की अनुमेय सीमा के मुकाबले जी.एस.डी.पी. के 2.80 प्रतिशत पर सीमित किया गया है। वर्ष 2024-25 के लिए सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 2.77 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का प्रस्ताव है, जो कि 3 प्रतिशत की अनुमेय सीमा के अंदर है।

        इतना ही नहीं, सकल ऋण स्टॉक को भी निर्धारित सीमा में रखने में सफल रहे हैं। संशोधित अनुमान 2023-24 में ऋण और सकल राज्य घरेलू उत्पाद का अनुपात 26 प्रतिशत है, जो कि 33.10 प्रतिशत के नॉर्मस की निर्धारित सीमा में है। वर्ष 2024-25 के लिए ऋण, स्टॉक सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 26.15 प्रतिशत अनुमानित है, जो 32.80 प्रतिशत के निर्धारित मानदंडों से काफी कम है। हम राजकोषीय विवेकशीलता अपनाना जारी रखेंगे, क्योंकि सतत आर्थिक विकास का यही एकमात्र मार्ग है।

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लाभांश में उल्लेखनीय वृद्धि

        वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों का वर्ष 2023-24 में कारोबार 79,907 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 11.94 प्रतिशत की वृद्धि है। पिछले 9 वर्षों की अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। वर्ष 2013-14 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के 43 उपक्रमों में से केवल 13 उपक्रमों ने 804 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। वर्ष 2022-23 के दौरान लाभ कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या बढ़कर 20 हो गई, जिनका कुल लाभ 1767 करोड़ रुपये रहा। इस तरह से 963 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण, सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उपक्रमों का संयुक्त ऋण मार्च 2014 के 60,576 करोड़ से 27.4 प्रतिशत कम होकर मार्च 2023 में 43,955 करोड़ रुपये हो गया है।

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